मंडी अभिकर्ता, मिलर्स और किसान हलाकान

भाटापारा। मौज है उन स्ट्रीट एनिमल की, जो कृषि उपज मंडी के पास विचरण करते हैं। खुले आधा दर्जन की संख्या के आसपास गेट से निर्बाध आवाजाही तो मानो निमंत्रण ही देती है, उस अनाज के सेवन के लिए जो ढेर के रूप में लगी हुई है। नुकसान का सामना कर रहे किसानों की तो दूर, अभिकर्ताओं और मिलरों तक की सुनने को कोई तैयार नहीं है।

लचर होती कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर से कृषि उपज मंडी चर्चा में आ रही है। प्रांगण निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखने के मामले में चर्चा में चल रही कृषि उपज मंडी में, अब उपज को नुकसान पहुंचाने वाले आवारा मवेशियों को लेकर नाराजगी देखने में आ रही है। शिकायतों पर कार्रवाई तो दूर सुनने को तैयार नहीं, प्रबंधन पर भी लचर व्यवस्था के लिए सवालों का उठना चालू हो चला है।

नुकसान पहुंचा रहे मवेशी

खरीफ फसल की आवक बनी हुई है। तुरंत बाद रबी फसल की आवक होनी है। इस बीच दलहन- तिलहन की आवक भी बढ़त ले रही है। खुले में घूम रहे स्ट्रीट एनिमल के लिए सभी खुले गेट, निर्बाध आवाजाही को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। खासकर मुख्य मार्ग के तीन गेट तो नुकसान की बड़ी वजह बन रहे हैं। मालूम हो कि इस क्षेत्र में दलहन-तिलहन और गेहूं की नीलामी होती है। ऐसे में ढेर की शक्ल में रखी उपज, आवारा मवेशियों के लिए सर्वोत्तम आहार बन रही है।

किनारे के गेट से भी प्रवेश

दलहन-तिलहन ही नहीं, किनारे के खुले गेट धान की फसल लेने वाले किसानों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। इन दरवाजों से भी होकर स्ट्रीट एनिमल प्रवेश कर रहे हैं और नुकसान पहुंचा रहे हैं किसानों की मेहनत को। रोकने या टोकने के लिए तैनात कर्मचारियों की नजर शायद बिगड़ती इस व्यवस्था पर नहीं है।

किससे करें शिकायत

मंडी अभिकर्ता, मिलर्स और किसानों के सामने इस समय सबसे बड़ी समस्या यह है कि शिकायत करें तो किससे ? क्योंकि सुनवाई के लिए किसी के पास फुर्सत नहीं है। ऐसे में उपज की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसान पर आ रही है या फिर अभिकर्ताओं के कर्मचारियों पर। पूरी तरह प्रतिकूल माहौल में हो रहे कार्य संचालन से आ रही परेशानी बढ़त ले रही है।मंडी अभिकर्ता, मिलर्स और किसानों के सामने इस समय सबसे बड़ी समस्या यह है कि शिकायत करें तो किससे ? क्योंकि सुनवाई के लिए किसी के पास फुर्सत नहीं है। ऐसे में उपज की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसान पर आ रही है या फिर अभिकर्ताओं के कर्मचारियों पर। पूरी तरह प्रतिकूल माहौल में हो रहे कार्य संचालन से आ रही परेशानी बढ़त ले रही है।