प्लास्टिक बैग में निकली घरेलू मांग
भाटापारा। मांग में कमी आते ही ओल्ड जूट बैग की कीमत अब टूटने लगी है। गिरावट की गति को देखते हुए, बचा हुआ बारदाना होलसेल मार्केट को वापस किया जाने लगा है। इसमें भी रिटेल काउंटर को होलसेल की शर्तें माननी पड़ रही है। याने उनकी ही कीमत पर बचे बारदाने की वापसी हो रही है।
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को शुरू हुए महीना गुजरने वाला है। इस बीच लघु एवं सीमांत किसानों की कृषि उपज की खरीदी भी लगभग अंतिम दौर में है। अब बारी है बड़े किसानों की, जिनकी मांग ओल्ड जूट बैग में पूरी हो चुकी है। ऐसे में पुराने बारदाने की दुकानों में सन्नाटा तेजी से फैलता नजर आता है। सीजन के शुरुआती दौर में खरीदी से गुलजार, यह चिल्हर दुकानें, अब बचे हुए बारदाने को सहेज कर वापसी की तैयारी में लगी हुईं हैं क्योंकि खरीदी का सिलसिला अब खत्म हो चुका है। इस बीच थोड़ी-बहुत खरीदी हो रही है, लेकिन भाव जैसे टूट रहे हैं, उसे देखते हुए वापसी में ही भलाई की उम्मीद जताई जा रही है।
वापसी इस दर पर
चिल्हर बाजार से बचा हुआ बारदाना 19 से 21 रुपए में वापस किया जा रहा है। जबकि खरीदी प्रति बारदाना दो रुपए अधिक में की गई थी। इस तरह यह नुकसान चिल्हर बाजार उठा रहा है। विरोध या नाराजगी नहीं है क्योंकि वापस नहीं किए गए तो नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
इसलिए कर रहे वापस
पुराना बारदाना की वापसी होलसेल मार्केट को इसलिए हो रही है क्योंकि भंडारण की जगह नहीं है। यदि किसी तरह रख भी लिया गया तो चूहे इसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके बाद यह ना तो बिक्री के लायक रहेंगे, ना दूसरे काम आ पाएंगे। इसलिए इसे वापस किया जा रहा है।
अब इस कीमत पर
बाजार से विदा ले रहे पुराने बारदाना की कीमत जिस गति से नीचे जा रहें हैं ,उसके बाद न्यूनतम 19 रुपए और अधिकतम 22 रुपए प्रति नग पर आ चुके है। पैबंद लगे बारदाने की स्थिति कैसी होगी? सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
15 था ,15 है
जूट, बारदाने की तुलना में प्लास्टिक बैग की मांग बनी हुई है। इसमें किसानों की नहीं बल्कि घरेलू मांग का दबाव बनता नजर आता है। इसलिए 15 रुपए प्रति बैग की कीमत पर शुरू हुआ बाजार, इसी कीमत पर अब भी बना हुआ है।


