अनलॉक बाजार में बना रहा पहुंच
बिलासपुर। डायरी और कैलेंडर बनाने वाली यूनिटों की उम्मीदें परवान चढ़ने लगीं हैं। बीते 18 माह से शून्य पर चल रहा यह क्षेत्र, न केवल पूरी योजना के साथ फिर से तैयार है बल्कि ऑर्डर के संभावित क्षेत्रों में पहुंच भी बनाने में लगा है।
डायरी और कैलेंडर निर्माण कंपनियों का सीजन चालू हो चला है। 18 माह से यूनिटों में लगा ताला, ना केवल खोला जा चुका है बल्कि अपने पुराने कारोबारियों से संपर्क साधने का काम भी किया जाने लगा है। इसके अलावा ऐसे क्षेत्र भी तलाशे जा रहे हैं, जहां से इन दोनों सामग्रियों के लिए आर्डर मिल सके। बेहतर दिन की उम्मीद में दिल्ली और मुंबई की यूनिटों के मार्केटिंग ऑफिसरों की पहुंच तेजी लेने लगी है।
सफर चुनौती भरा
कोरोना काल में लगभग शून्य पर जा चुका डायरी और कैलेंडर का बाजार चुनौती भरे रास्ते पर चल पड़ा है। उसे फिर से अपनी खोई हुई जमीन वापस लेनी है। इसलिए दीपावली और नए साल के आर्डर एक साथ लिए जाने की कोशिश है। यूनिटों के सेल्स मैनेजर और दूसरे अधिकारी अपनी पुरानी संस्थानों में पहुंच बना रहे हैं, तो नए ठिकाने की तलाश भी साथ- साथ की जा रही है।
यहां से है भरोसा
डायरी और कैलेंडर के लिए अपने प्रदेश में राजधानी रायपुर के अलावा दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, कोरबा और रायगढ़ हमेशा से शीर्ष पर रहे हैं। वृहद, मध्यम और लघु उद्योगों की अच्छी संख्या से अच्छे दिन की उम्मीद बंधी हुई है। लिहाजा यूनिटों का फोकस पहले चरण में इन्हीं शहरों पर है। इसके बाद दूसरे जिलों की ओर रुख किए जाने की योजना है।
मिल रहा ऐसा रुझान
जैसी जानकारी मिल रही है उसके अनुसार डायरी और कैलेंडर का बाजार 60 फ़ीसदी तक जाने की पूरी संभावना है क्योंकि बड़ी संस्थानों और उद्योगों में दीप पर्व की तैयारियों ने जोर पकड़ा हुआ है। इसे देखकर शत-प्रतिशत तो नहीं लेकिन 50 से 60 फीसदी का लक्ष्य हासिल करने की संभावना बन चुकी है।
अनलॉक बिजनेस में, इस बरस डायरी और कैलेंडर के लिए संभावना बेहतर दिखाई देती है। रुझान भी अच्छा दिखाई दे रहा है। पूछ-परख चालू हो चुकी है।
-अनिल अग्रवाल, संचालक, अंकुर प्रिंटर्स,बिलासपुर


