सड़क पर दुकानें और अनियंत्रित पार्किंग ने बिगाड़ी व्यवस्था

जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी

भाटापारा। सोई हुई है यातायात पुलिस। फायदा उठा रहे वे कारोबारी, जिनकी दुकानें सड़़क को आधी घेर चुकीं हैं। मौका नहीं छोड़ रहे वे बाइकर्स, जिनकी दोपहिया वाहन फर्राटे भरते हुए आंखों के सामने से गुजर रहीं हैं। नवरात्रि शुरू हो चुकी है ,ऐसे में यह दृश्य पूरे शहर में देखे जा सकते हैं।

अस्त, व्यस्त और ध्वस्त। यही तीन ऐसे शब्द हैं जिन्हें, यातायात पुलिस के खाते में लिखा जा सकता है। काम करते हैं, लेकिन यह काम केवल चौक- चौराहों पर खड़े होने तक ही सिमट चुका है। सतर्क होने की जरूरत थी क्योंकि नवरात्रि पर देवी दर्शन की भीड़ बढ़ चली है लेकिन यह सतर्कता गायब है। ऐसे में शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है।


संवेदनशील तिराहा

व्यस्त माना जाता है सिविल हॉस्पिटल तिराहा। निजी अस्पताल, बैंकिंग प्रतिष्ठानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की वजह से यह तिराहा निरंतर यातायात के दबाव में रहता है। जवानों की तैनाती की जाती है। कितने सजग हैं ? यह इसी बात से जाना जा सकता है कि नजरों के सामने से फर्राटे भरते बाइकर्स गुजर जाते हैं। संस्थानों के सामने खड़ी वाहन, सड़क के आधे हिस्से को घेर कर रखा जाता हुआ, कभी भी देखा जा सकता है लेकिन कार्रवाई तो दूर चेतावनी तक नहीं दी जाती।


जाम, हर दिन आम

कृषि उपज मंडी। सीजन या ऑफ सीजन। हर समय इस मार्ग पर जाम के दृश्य, आम हैं। खरीफ फसल की आवक के बाद अब यह नजारे सुबह 5 बजे से शाम 7 बजे तक देखे जा सकते हैं। रही- सही कसर वह छोटी ट्रक पूरी कर रही है, जिसे बिगड़ने के बाद सड़क पर छोड़ दिया गया है। नवरात्रि है, इसलिए सड़क पर ही पंडाल बनाने से कौन रोकेगा ? जैसे शब्दों को चरितार्थ होता देखना है, तो इस रास्ते पर चले जाइए। जगह मंडी की है लेकिन इस मनमौजी प्रवृत्ति पर लगाम कसने की जरूरत समझी गई होगी, यह कभी देखा नहीं गया।


सावधान रहें इस चौक से

बस स्टैंड और गोविंद चौक से यदि गुजर रहे हैं तो सावधान और सतर्क रहना बेहद जरूरी होगा। कभी भी, किसी भी कोने से आ रही वाहन, दुर्घटना का कारण बन सकती है। यातायात के जवान यहां भी नजर आएंगे लेकिन कार्रवाई तो दूर रोकने की भी कोशिश नहीं की जाती। इन दोनों चौक से गुजरने वाली सड़क पर दुकानें उतर आई है। लिहाजा जाम की स्थिति प्रतिदिन बनी रहती है। पर्व और त्यौहार शुरू हो चुके हैं, ऐसे में यह दृश्य आम हो चले हैं।


किसकी अनुमति से पार्किंग

जय स्तंभ चौक के आसपास का नजारा तो हैरत में डालता है। सड़क पर चार पहिया वाहनों की पार्किंग, दुकान और सेंट्रल पार्किंग को देखकर पूछा जाने लगा है कि आखिर इसकी अनुमति किसने दी ? नगर पालिका ने या किसी जिम्मेदार अधिकारी ने ? सवालों के जवाब नहीं मिलेंगे क्योंकि जिम्मेदारी से सभी ने आंखें मूंद रखी हुई है।