पोहा मिलों के सामने बाजार का संकट
बिलासपुर । समर्थन मूल्य में 72 रुपए की वृद्धि की घोषणा के बाद चावल की कीमत उबाल लेने लगी है। इधर महंगे में धान की खरीदी करने वाली पोहा मिलें, कमजोर बाजार का सामना करने पर मजबूर है। लिहाजा कीमत 300 रुपए नीचे पहुंचने की खबर है। आशंका आगे भी मंदी की बनी हुई है।
चालू खरीफ सत्र में किसानों से धान की खरीदी 1940 रुपए क्विंटल की दर पर की जाएगी। बीते खरीफ की तुलना में 72 रुपए की वृद्धि की केंद्र सरकार की घोषणा के बाद चावल बाजार में गर्मी का आना चालू हो चुका है। उपर से पर्व और त्यौहार ने भी दस्तक दे दी है। इसलिए तेजी का यह क्रम आने वाली दीपावली तक बना रहेगा।
उत्पादन और घोषणा
बीते खरीफ सत्र में केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य की दर 1868 रुपए प्रति क्विंटल घोषित की थी। चालू खरीफ सत्र में 72 रुपए की बढ़ोतरी की जा चुकी है। यानी चावल मिलों को 1940 रुपए क्विंटल की दर पर धान की खरीदी करनी होगी। सीधा असर चावल की कीमत पर पड़ेगा। इस बार केंद्र सरकार ने चावल उत्पादन लक्ष्य 123 मिलियन टन रखा है। यह बीते साल की तुलना में 9 मिलियन टन ज्यादा है।
उबल रहा चावल
समर्थन मूल्य की घोषणा के बाद चावल की कीमतें बढ़ चुकी हैं। होलसेल और रिटेल काउंटर को सियाराम चावल की खरीदी 4000 से 4500 रुपए क्विंटल की दर पर करनी पड़ रही है, तो एचएमटी चावल 4000 रुपए क्विंटल की ऊंचाई पर पहुंच चुका है। विष्णुभोग ने पहली बार 7000 रुपए क्विंटल का नया भाव अपने नाम कर लिया है। सरना चावल में भी तेजी आ चुकी है। 200 रुपए की तेजी के बाद अब सरना चावल 2200 से 2250 रुपए क्विंटल की दर पर पहुंच चुका है।
टूट रहा पोहा
समर्थन मूल्य की घोषणा के बाद महामाया धान भी महंगा हुआ है। ऐसे में पोहा की कीमत में भी तेजी आनी थी लेकिन यह 300 रुपए नीचे आ चुका है। आगे भी मंदी के आसार के बीच महाराष्ट्र जैसे बड़े खरीददार राज्य की खरीदी, मोटा पोहा में 2700 से 2900 रुपए क्विंटल और बारीक पोहा में 3100 रुपए क्विंटल पर आकर ठहरी हुई है। ऊंची कीमत में धान की खरीदी के बाद पोहा की गिरती कीमत, पोहा मिलों को संकट में डाल रही है।



