अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के छूटे पसीने
भाटापारा। कम से कम छह ऐसी जगह हैं, जहां हर पल व्यवस्था को अव्यवस्था में बदलता हुआ देखा जा सकता है। ट्रैफिक सिग्नल है, पर परवाह नहीं। ट्रैफिक जवान भी है, पर मौजूदगी सड़क पर नहीं, एक कोने में नजर आती है। ऐसे में चुस्त व्यवस्था की उम्मीद मत कीजिए क्योंकि यातायात व्यवस्थाअपनी मर्जी से चलता है।
गौरव पथ का बनना, जिस दिन शुरू हुआ था, तब सपना गया देखा था कि सुव्यवस्थित आवाजाही आसान हो सकेगी। लेकिन यह सपना अब टूट चुका है क्योंकि यातायात विभाग की लापरवाही कदम -कदम पर नजर आती है। हमने भी अपनी दुकाने सड़क तक फैला लीं हैं। कभी- कभार होने वाली कार्रवाई से हमें डर नहीं लगता क्योंकि व्यवस्था में कई ऐसे छिद्र हैं, जिनके जरिए सुरक्षित निकला जा सकता है। लिहाजा जाम और सिर्फ जाम। जैसे नजारे यहां आम हो चले हैं।
फिल्टर प्लांट दोराहा
रायपुर से आने वाली वाहनों को शहर प्रवेश के लिए फिल्टर प्लांट दोराहा पार करना होगा। पहली सड़क, शहर का द्वार खोलती है तो दूसरा मार्ग लिंक रोड के नाम से पहचाना जाता है। संभल कर चलिए क्योंकि बाइकर्स जीवन को खतरे में डाल सकते हैं। लिंक रोड पर चल रही भारी वाहनों से भी सावधान रहना होगा क्योंकि तेज गति पर ब्रेक लगाने वाले, यहां नहीं मिलेंगे।
फव्वारा चौक
आगे बढ़ने पर फव्वारा चौक पहुंचने के पहले, महारानी चौक और दो छोटे दोराहे पर भी सावधानी से निकलें क्योंकि कभी भी, दोपहिया या चार पहिया वाहन अपनी चपेट में ले सकती है। बचकर निकलने के बाद फव्वारा चौक पहुंचें। यहां जरा संभलकर निकलना होगा क्योंकि सिग्नल, काम तो करते हैं लेकिन कब, कौन सा वाहन किधर से निकल जाए ? इसकी गारंटी तो वे जवान भी नहीं लेंगे, जिनको व्यवस्था संभालने का जिम्मा दिया गया है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि इनकी दिलचस्पी एक कोने में बैठे रहने में ज्यादा होती है।
सदाबहार जयस्तंभ चौक
फव्वारा चौक में सड़कों पर ही खड़ी की जाने वाली वाहन से किसी तरह निकलने के बाद, जयस्तंभ चौक और आगे कुछ कदम की दूरी के बाद ,शहर से बाहर निकलने वाला हर मार्ग, बदहाल व्यवस्था की बानगी बन चुका है। जयस्तंभ चौक, जिसे अघोषित रूप से चार पहिया वाहनों की पार्किंग बना दिया गया है, तो आगे की चौड़ी सड़क के दोनों किनारों पर सब्जी दुकानें लग रहीं हैं।
गोविंद की चुनौती
हर वक्त जाम की स्थिति में रहने वाला गोविंद चौक, जैसी चुनौती दे रहा है, उसे स्वीकार करने की हिम्मत किसी के भी पास नहीं है। उस ,शहर पुलिस के पास भी नहीं, जिसका कार्यालय महज कुछ मिनट में पहुंचा जा सकता है। और हां, यातायात विभाग के तो हाथ-पैर ही फूल जाते हैं, व्यवस्था संभालने में। लिहाजा ड्यूटी पर जवान तो दिखाई जरूर देंगे ? लेकिन कब तक ? यह सवाल नहीं पूछें, तो सही होगा।
गजब है यह चौक
बिलासपुर या बलौदा बाजार जाने के लिए बस स्टैंड चौक से निकलना होगा। बस स्टैंड यानी बस ,ऑटो। करीब ही है, कृषि उपज मंडी। मंडी का मतलब ट्रैक्टर, ट्रक, ठेला और बैलगाड़ी। साथ में दोपहिया पर किसानों की भीड़। मालूम हो कि इसी जगह चिल्हर सब्जी बाजार भी लगता है। गोविंद चौक के बाद, यह ऐसी दूसरी जगह है, जहां हर मिनट नियम टूटते हैं। दिलचस्प यह कि इसी जगह पर यातायात पुलिस का कार्यालय है, मगर वह भीतर मिलेंगे, फील्ड में नहीं।


