भाटापारा। आज से 10 साल पहले शहीद नंदकुमार पटेल जब भाटापारा प्रवास पर आए थे , उस वक्त उन्होंने कहा था कि प्रदेश में जैसे ही कांग्रेस की सरकार बनेगी भाटापारा को स्वतंत्र जिले का दर्जा दिया जाएगा । छत्तीसगढ़ में 36 जिले बनने चाहिए | वर्तमान में 27 जिले हैं | प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने पर 28 वां जिला भाटापारा होगा लेकिन अफसोस , नंद कुमार पटेल झीरम घाटी में शहीद हो गए, उनके साथ ही उनका सपना भी अधूरा रह गया ।
प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी 2018 में भाटापारा आए, उन्होंने भी आदिवासी सम्मेलन के दौरान पीएल पुनिया, डॉ चरणदास महंत, डॉ शिव कुमार डहरिया, राजकमल सिंघानिया जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में भाटापारा निवासियों से वादा किया था कि वे शहीद नंदकुमार पटेल का सपना जरूर पूरा करेंगे। प्रदेश में जैसे ही कांग्रेस की सरकार बनेगी भाटापारा को स्वतंत्र
जिला का दर्जा मिलेगा।


इंतज़ार में बीता ढाई साल

चुनावी घोषणा पत्र तैयार करने हेतु प्रदेश के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने भी इस बात का समर्थन किया कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने पर स्वर्गीय नंदकुमार पटेल के सपनों को हम मूर्त रूप देंगे लेकिन भाटापारा का दुर्भाग्य ही कहें कि वर्तमान में कांग्रेस की सरकार को ढाई साल से ऊपर हो गए हैं परंतु भाटापारा को स्वतंत्र जिले का दर्जा अब तक नहीं मिला। आज भी भाटापारा स्वतंत्र जिले की राह देख रहा है ।


दुबे आयोग ने की थी सिफारिश

भाटापारा, छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी नगरपालिका है । हावड़ा -मुंबई-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग से जुड़ा है। यातायात के संपूर्ण साधन हैं। प्रदेश की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडी, पोहा, चांवला और दाल मिलों की संख्या अच्छी खासी होने के बावजूद भाटापारा, विकास की राह देख रहा है। 35 बरस से मांग उठती आ रही हैं । 1986 में दुबे आयोग भाटापारा को स्वतंत्र राजस्व जिला बनाए जाने की बात अपनी रिपोर्ट में कही थी लेकिन भाटापारा अपने वाजिब हक के लिए आज भी तरस रहा है।

आखिर कब होगा भाग्योदय

छत्तीसगढ़ में सरकार तो बदल गई लेकिन भाटापारा का भाग्योदय अब तक नहीं हुआ। भौगोलिक स्थितियां पूरा साथ दे रही हैं। इसी तरह शहर का हर वर्ग भी अब खुलकर सामने आ रहा हैं। प्रबुध्द जनों का कहना है कि आखिर कब तक ऐसे ही हम छले जाते रहेगें ।