कांटा तार और तार जाली का नया विकल्प
बिलासपुर। कांटा तार की बाड़ और तार जाली का, सस्ता और मजबूत विकल्प किसानों के बीच जमकर लोकप्रिय हो रहा है। फेंसिंग नेट नाम है इस विकल्प का, जो फसलों को मवेशियों से बचाने में सफल हो चुका है। कीमत के लिहाज से यह हर क्रय शक्ति की क्षमता वाले किसान के लिए उपलब्ध है।
इसलिए बढ़ रहा चलन
पहले कांटा तार। फिर तार जाली। जिसकी कीमत लगातार बढ़ रही है। ऊपर से लाने-ले-जाने में भी खर्च की जाने वाली रकम ज्यादा होती है। लगाने में कठिन परेशानियां। इसके बावजूद पानी, धूप की मार से कमजोर होना भी, फेंसिंग नेट के लिए बाजार तक पहुंच, आसान बना गई है। टिकाऊ, मजबूती, आसान परिवहन और कम लागत जैसी वजहों से बाजार तेजी से भी फैल रहा है।
बारिश की राह देख रहे किसानों के सामने अब अपनी फसलों को मवेशियों से बचाने की चिंता खड़ी हो चुकी है। जब तार जाली या कांटेदार तार भी मवेशियों को नहीं रोक पा रहे हों तो ऐसी स्थितियों में फैंसिंग नेट मजबूत सहारा बन रहा है क्योंकि इससे होकर फसलों तक पहुंच पाना लगभग मुश्किल है। सबसे अच्छी बात यह कि यह बेहद कम कीमत पर खरीदी जा सकती है और लाने ले जाने में भी सुविधाजनक है।
सब्जी बाड़ियां पहली ग्राहक
फेंसिंग नेट पर सबसे पहला भरोसा जताया उद्यानिकी फसल लेने वाले किसानों ने। मैदानी हकीकत जानने के बाद अब यह फूलों की खेती करने वाले किसानों तक पहुंच बना रहा है। यहां यह बता देना जरूरी होगा कि इस फेंसिंग नेट का उपयोग बेल वाली सब्जी की फसलों के लिए भी किया जाने लगा है। यानी एक खर्च में दो तरह के काम किए जा सकते हैं।
अब धान के खेतों की ओर
अब धान के खेतों की ओर
उद्यानिकी फसलों की सुरक्षा में सफल होने के बाद ,अब इसकी खरीदी, धान की फसल लेने वाले किसानों ने शुरू कर दी है। हो रही खरीदी यह बता रही है कि यह क्षेत्र भी इसे अपनाने को तैयार है। इस समय 5 फीट ऊंचाई और 38 फीट लंबाई वाले फैंसिंग नेट 220 से 250 रुपए किलो की दर पर किसानों के लिए उपलब्ध है।
फेंसिंग नेट, उपलब्ध तार जाली और कांटेदार बाड़ का बेहतर विकल्प है। मजबूती और कीमत का कम होना बढ़ती बिक्री की वजह है।
- मोहन बजाज, संचालक, बजाज रस्सी वाला, बिलासपुर


