खरीदी से दूरी बनाई मछली पालकों ने

बिलासपुर। भरपूर जलभराव की राह देखते तालाब और जलाशय , बांधों के गेट खोले जाने के बाद तट से दूर होता पानी को देखकर ,अब मछली पालक उस बाजार से तेजी से दूर होने लगे हैं, जहां मछली जाल का विक्रय किया जाता है । संकट इतना अधिक है कि मानसून की भविष्यवाणी पर भरोसा करके अच्छी-खासी, मात्रा में खरीदे गए मछली जाल को बेचने में अब पसीने छूटने लगे हैं ।

बस्तर, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर और कोरबा के बाद बिलासपुर में स्थिति तेजी से बिगड़ती नजर आती है । बिलासपुर का मछली जाल बाजार, मरवाही और मुंगेली के साथ बलौदा बाजार जिले को भी जाल की सप्लाई करता है । यह बाजार इस समय खरीददारों का इंतजार कर रहा है क्योंकि गोदाम से अब तक ,जाल का निकाला जाना चालू नहीं किया जा सका है । कीमत कम करके बेचने की योजना भी परवान नहीं चढ़ पाई । यह इसलिए क्योंकि तालाब और जलाशय का पानी तेजी से किनारा छोड़ रहा है । बारिश अब नहीं तो कब ? जैसे सवाल का उठना यहां लगभग बंद हो चुका है ।

संकट हुआ गहरा

मछली जाल का बाजार, अल्प बारिश से वैसे भी संकट में है l बांध और जलाशयों से छोड़ा जा रहा पानी इस संकट को और भी गहरा करता नजर आता है । यह इसलिए क्योंकि उम्मीद थी कि मछली पालन के लिए तालाब और जलाशयों को ठेके पर लेने वाले ठेकेदारों की खरीदी से बाजार को गति मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया क्योंकि सरकार ने फसलों को सिंचाई पानी देने के लिए गेट खोल दिए हैं । ऐसे में बाजार को गति मिलेगी, इस उम्मीद पर पानी फिर गया है और बाजार पूरी तरह जमीन पर आ चुका है ।

यह दुविधा भी

बादलों का जैसा रुख बना हुआ है उसके बाद तेज धूप, तालाब और जलाशयों पर कहर बनकर टूट रही है । ऐसे मौसम में वाष्पन की मात्रा इस समय 4 मिलीमीटर प्रति घंटा पर पहुंच गई है जबकि इसे आधे पर याने दो मिली मीटर प्रति घंटा पर होना चाहिए था । मतलब यह कि पानी के भाप बनकर उड़ने की प्रक्रिया दोगुनी गति से चल रही है ।

ऐसे हैं भाव

मानसून के बेहतर होने के पूर्वानुमान के बाद फिश नेट मार्केट ने इस बरस गुजरात से भरपूर मात्रा में मछली जाल की खरीदी की हुई है । हालात इस तेजी से अप्रिय हो जाएंगे, इसकी उम्मीद जरा भी नहीं थी । फिर भी यह बाजार इस बरस 300 से 500 रुपए किलो में धागे से बना हुआ जाल बेच रहा है । चाइना की नायलॉन नेट 300 से 500 रुपए किलो की दर पर खरीदी की राह देख रही है ।

फिश नेट का मार्केट पूरी तरह जमीन पर आ चुका है । तालाब और जलाशय में पानी की मात्रा बेहद कम है । सिंचाई के लिए गेट के खोले जाने के बाद बाजार में अब उठाव शून्य पर आ चुका हैं ।

मोहन बजाज, संचालक बजाज रस्सी वाला, बिलासपुर