एक बार फिर लोकसेवक, निर्वाचित जनप्रतिनिधि और नागरिकों के बीच टकराव के हालात हैं, ताजा मामला छत्तीसगढ़ में बिलासपुर जिले के रतनपुर नगरपालिका का है. जहां की मुख्य नगर पालिका अधिकारी मधुलिका सिंह है. डेढ़ साल से ज्यादा अरसे से यहां पदस्थ है. नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं देने वाली संस्था की सबसे बड़ी अधिकारी होने के बाद भी खुद उनका शहर को इस सेवा देने वाली अपनी संस्था पर भरोसा नहीं है अगर सच में उनका भरोसा अपनी संस्थान पर होता तो वो अपने मुख्यालय में ही अपने परिवार के साथ निवास करती. करोना काल का डेढ़ साल का अरसा गुजर गया. बेहतर सुविधाएं मुहैया करानी तो दूर नागरिकों को भगवान भरोसे छोड़ कर जिला मुख्यालय में अपने लिए सुरक्षा सुनिश्चित करती रही. कभी कभार जिला प्रशासन के फरमानों की औपचारिकताओं पूरी करने वो भी उच्च अधिकरियों की मौजूदगी होने पर फोटो सेशन कराने चली आती. इधर शहर के नागरिक मूलभूत समस्याओं से दो चार होते रहे. इनकी संवेदना की मिसाल ऐसी की मुख्य मंत्री के निर्देश के बाद भी नगर पालिका की ओर से कोविड अस्पताल खोलने के लिए कोई पहल नहीं की. उल्टे जब महामाया मंदिर ट्रस्ट ने जगह और संसाधन उपलब्ध कराकर लखनीदेवी मंदिर परिसर में कोविड अस्पताल शुरू करा दी. तब कुछ पार्षदों ने भी अपने पार्षद मद की राशि इसमें देने पहल की तो उस पर पेंच लगा कर लटका दिया. इनकी मानवता की मिसाल सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रतनपुर परिसर में भी देखने को मिला जब धूप में लंबी लाइन लगाकर करोना की जांच करा रहे नगर के आम नागरिकों की चिंता छोड़कर शहर से लेकर आए अपने परिजनों को वीआईपी ट्रीटमेंट देने प्रभारी डाक्टर को दबंगई कर खुलेआम धमकाती सोशल मीडिया में प्रसारित विडियो में दिखी. इसकी भी शिकायत मेडम के रसूख की फ्रीजर में ठंडी हो गई. इनकी कर्तव्य परायणता ऐसी कि नगर पालिका परिषद कार्यालय में इनके कक्ष से सटे अध्यक्ष के कक्ष में सरकारी राशन दुकान की कालाबाजारी के राशन जमा होते रहे और ये उसके बाजू में स्थित अपने कक्ष से कड़ी बेमिसाल ईमानदारी से रोज आठ- आठ घंटे कामकाज करती रही और इसकी भनक नहीं लगी कि उसके संरक्षण वाले सरकारी भवन कालाबाजारी का अनाज जमा हो रहा. कड़ी मेहनत करने वाले नगर पालिका के अमले को भी इसकी भनक नहीं लगी.


ऐसी कर्तव्य परायण मुख्य नगरपालिका अधिकारी मधुलिका सिंह के सामने बुधवार को दोपहर एक निर्वाचित पार्षद और राज्य में सरकार चला रही पार्टी के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सूर्य नागरिकों के साथ मोहल्ले की मूलभूत सुविधाओं को लेकर आवाज बुलंद करते हैं तो राजा होने का दंभ पाले इस लोक सेवक महिला अधिकारी को इतना नागवार गुजरता है कि शासकीय सेवक होने के आचरण को भी बिखेरती नजर आती है, जिम्मेदार पद पर है तो पद की गरिमा को कायम रखने की जिम्मेदारी भी उन पर आयत होती है, सीएमओ मधुलिका सिंह का आरोप है कि घंटे भर तक पार्षद और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सूर्य और अन्य अभद्रता करते रहे इस बीच सीएमओ भी अपने मोबाइल पर फोटो खींचते और रिकार्डिंग करतीं दिखी, मामला इतना संवेदनशील और गंभीर था तो क्यों आप ने और आपके अधीनस्थ नगर पालिका कार्यालय में मौजूद एक भी स्टाप ने शासकीय कार्य में बाधा पहुंचा रहे लोगों से निपटने मौके पर पुलिस नहीं बुलाई. जिस अमले के साथ बड़े आत्मा विश्वास के साथ शहर की तफरीह करते पैदल तमाशाई होकर थाने पहुंचे. आपके एक फोन पर उसी थाने से पांच मिनट में पुलिस बल पहुँच सकती थी. आपका एक फोन संविधान पर लोगों के विश्वास को मजबूत करता और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचा रहे लोगों को जेल पहुंचाता. आपके इस कदाचरण से हमारा लोकतंत्र लहूलुहान हुआ. सजा की उम्मीद भी नहीं हमारे सिस्टम पर आपका रसूख भारी है.