प्राकृतिक कृषक मित्रों की तेजी से घट रही आबादी,

बिलासपुर। प्रकृति के अदृश्य कृषक मित्र हैं मधुमक्खियां, चमगादड़, उल्लू, लेडीबर्ड बीटल, केंचुए, ड्रैगनफ्लाई और सांप। यह सातों परागण, कीट नियंत्रण, मृदा उर्वरता और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लेकिन आधुनिक खेती के दौर में इनकी आबादी तेजी से कम हो रही है।

विश्व की 75 फ़ीसदी खाद्य फसलें किसी- न- किसी रूप में परागणकर्ताओं पर निर्भर है। जैव विविधता, केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा और कृषि स्थिरता की आधारशिला है। संयुक्त राष्ट्र संघ के इस खुलासे के बाद खेतों के आसपास मौजूद प्राकृतिक आवास, वृक्ष, झाड़ियां और जल स्रोतों में रहने वाले जीव- जंतुओं के संरक्षण को अब गंभीरता से लिया जाने लगा है क्योंकि इनकी मदद से ही खेती जलवायु सहिष्णु बन सकेगी।

सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी

मधुमक्खी श्रेष्ठ परागणकर्ता। फूलों से परागण एवं मकरंद एकत्रित करती है और अन्य फूलों तक पहुंचाती है। बागवानी फसलों में अमूल्य योगदान। रात्रिकालीन कीट नियंत्रक माना जाता है चमगादड़ों को। रात में सक्रिय होने वाले शत्रु कीट का भक्षण करता है, जिससे रासायनिक कीटनाशक की जरूरत कम पड़ती है। उल्लू को खेतों का मौन प्रहरी का खिताब मिला हुआ है। चूहा इनके प्राकृतिक आहार हैं। तैयार फसलों के साथ-साथ भंडारगृहों में भी नुकसान पहुंचाने वाले चूहों से मुक्त रखता है उल्लू।

छोटा कीट बड़ा योगदान

रस चूषक छोटे कीटों का प्राकृतिक दुश्मन है लेडीबर्ड बीटल। केंचुए को भूमिगत कृषि अभियंता इसलिए कहा जाता है क्योंकि मिट्टी की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणवत्ता को सुधारे रखता है। बेहद अहम इसलिए क्योंकि खेतों की जल धारण क्षमता भी बढ़ाते हैं। धान की फसल का मौन सुरक्षा प्रहरी है ड्रैगनफ्लाई। हानिकारक कीटों की आबादी को काबू में रखता है। सांप, उपयोगी सहयोगी इसलिए क्योंकि यह खेतों और भंडार गृहों को चूहों से मुक्त रखते हैं।

मांग रहे संरक्षण

किसान केवल भूमि, जल, बीज और संसाधनों के सहारे सफल नहीं हो सकता। प्रकृति के असंख्य जीव- जंतु खेती को सफल बनाने में निरंतर सहयोग देते हैं। मधुमक्खियां परागण करतीं हैं। उल्लू और सांप चूहों को नियंत्रित करते हैं। चमगादड़ और ड्रैगनफ्लाई शत्रु कीट का भक्षण करते हैं और केंचुए मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं। इनका आवास और संरक्षण इसलिए आवश्यक है क्योंकि यही ऐसे जीव- जंतु हैं जिनकी मदद से कृषि को लाभकारी और जलवायु सहिष्णु बनाया जा सकता है।

प्रकृति के अदृश्य कृषक मित्रों को बचाना आवश्यक

किसान की सबसे बड़ी ताकत केवल उन्नत बीज या उर्वरक नहीं, बल्कि खेतों में मौजूद जैव विविधता भी है। यह सभी जीव प्राकृतिक रूप से परागण, कीट एवं चूहा नियंत्रण तथा मृदा उर्वरता बनाए रखने का कार्य करते हैं। यदि इनके प्राकृतिक आवास नष्ट होते रहे और रासायनिक कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग जारी रहा, तो खेती की लागत बढ़ेगी और उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। प्रकृति के इन अदृश्य सहयोगियों का संरक्षण ही भविष्य की लाभकारी, टिकाऊ और जलवायु-सहिष्णु कृषि की मजबूत नींव है।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर