बिलासपुर। तेज धूप, लंबा शुष्क अंतराल। तेजी से खत्म हो रही नमी के बीच सांवा, बदौरी के साथ चार अन्य जिद्दी खरपतवार नजर आने लगे हैं, जिन्हें मुख्य फसलों के लिए बड़ी मुसीबत माना जाता है।
कल्टीवेशन चार्ज में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, बीज की नियंत्रण से बाहर जाती कीमतें और समय पर रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता नहीं होने की परेशानी झेल रहे किसान अब खेतों में तेजी से फैलाव ले रहे खरपतवार से बचाव के उपाय खोज रहे हैं।

गहरा और घना कल्टीवेशन फिर भी…
शीघ्र, मध्यम और दीर्घ अवधि में तैयार होने वाली फसलों के पूर्व गहरा और घना कल्टीवेशन की वैज्ञानिकों की सलाह मानी थी किसानों ने, इसके बावजूद कई तरह के खरपतवार जिस अनुपात में नजर आ रहे हैं उससे किसान इसलिए चिंतित हैं क्योंकि मुख्य फसल के पौधे फिलहाल अंकुरण की अवस्था में है। इस अवस्था में खरपतवार का छिड़काव मुख्य फसल को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
बेहद जिद्दी यह छह
सांवा,बदौरी, चौड़ी पत्ती, सकरी पत्ती, जंगली दूब और गोंदईला ऐसे खरपतवार हैं, जिन्हें पूरी तरह खत्म कर पाना बेहद कठिन है। लंबा शुष्क अंतराल और तेज धूप की वजह से खेतों से गायब होती नमी का पूरा फायदा उठा रहे हैं यह खरपतवार। इनकी बढ़वार इतनी तेज देखी जा रही है कि मुख्य फसल के तैयार होते पौधे भी खतरे में आने लगे हैं।

झटका कीटनाशक बाजार को
कीटनाशक और खरपतवारनाशक दवाओं के लिए जरूरी रसायनों की कीमतें हर बरस बढ़ती रहीं हैं। लेकिन क्रयशक्ति के भीतर ही इसकी खरीदी में पहली बार पांच से दस प्रतिशत वृद्धि इसलिए संभावित है क्योंकि पैकिंग मैटेरियल के साथ परिवहन दरों में जोरदार इजाफा हुआ है। संस्थानें फिलहाल उत्पादक कंपनियों से जारी होने वाली कीमतों की प्रतीक्षा में हैं।
वैज्ञानिक सलाह पर करें खरपतवार प्रबंधन
लंबे शुष्क अंतराल और तेज धूप से मुख्य फसलों की तुलना में कई खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं। अंकुरण अवस्था में रासायनिक खरपतवारनाशी का अंधाधुंध प्रयोग नुकसानदेह हो सकता है। किसान समय पर यांत्रिक निराई, नमी संरक्षण तथा वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही खरपतवार प्रबंधन अपनाएं, तभी उपज का नुकसान कम किया जा सकेगा।
डॉ. एस. आर. पटेल, रिटायर्ड साइंटिस्ट (एग्रोनॉमी), इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर