बिलासपुर। तेज हवाएं, घनघोर बादल और बारिश। खेतों में हैं, तो काम फौरन रोकें। कृषि उपकरण जैसे फावड़ा, कुदाल आदि से दूरी बनाए रखें। बड़े वृक्षों की शरण तो कदापि नहीं लें क्योंकि यह सभी आकाशीय बिजली के प्रति सुचालक होते हैं।

जलवायु परिवर्तन, अलनीनो और बढ़ते तापमान के बाद अब आकाशीय बिजली गिरने के बढ़ते मामले डरा रहे हैं।फौरी अनुसंधान में छत्तीसगढ़ को इसलिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यहां के बस्तर, सरगुजा, कोरिया, जशपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा- मरवाही और बिलासपुर जिले में मानसून के दिनों में तीव्र संवहनीय बादल बनते हैं और कुछ पल में ही आकाशीय बिजली का रूप ले लेते हैं।

यह अलर्ट जारी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने आकाशीय बिजली को लेकर जारी अलर्ट में कहा है कि जलवायु परिवर्तन, अलनीनो की वजह से आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं की तीव्रता और आवृत्ति में बढ़ोतरी हो रही है। इसलिए कृषि वानिकी और ग्रामीण विकास योजनाओं में लाइटनिंग रिस्क मैनेजमेंट जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से करनी होगी, तब ही आकाशीय बिजली से होने वाली जनहानि से बचा जा सकेगा।

छत्तीसगढ़ इसलिए संवेदनशील

छत्तीसगढ़ के बस्तर, सरगुजा, कोरिया, जशपुर, कोरबा, गौरेला- पेंड्रा- मरवाही तथा बिलासपुर जिला को इसलिए विशेष संवेदनशील माना जाता है क्योंकि मानसून के दिनों में यहां तीव्र संवहनीय बादल बनते हैं। अनुसंधान में खुलासा भी हुआ है कि बढ़ता तापमान और वायुमंडलीय स्थिरता के प्रभाव की वजह से यह क्षेत्र भविष्य में आकाशीय बिजली गिरने की संख्या के मामले में सबसे आगे रहेंगे।

जोखिम बढ़ाने वाले यह वृक्ष

नीलगिरी, अत्यधिक ऊंचाई और सीधा तना। सागौन परिपक्व वृक्ष। पीपल, गांवों एवं खुली जगहों पर इसके विशाल वृक्ष। चौड़े फैलाव वाला बरगद, ताड़ का वृक्ष, नीम, इमली, अर्जुन, आम, ओक, एल्प,पाईन एवं स्प्रूस। वानिकी वृक्षों की यह प्रजातियां इसलिए आकाशीय बिजली के प्रति सुचालक होतीं हैं क्योंकि इनमें सीधे, ऊंचे, नमी और रस की भरपूर मात्रा होती है।

यह एडवाइजरी

गरज-चमक के समय किसी भी अकेले एवं ऊंचे वृक्षों के नीचे आश्रय नहीं लें। खेत में चल रहे काम फौरन रोकें। लोहे से बने कृषि औजार तथा कृषि उपकरणों से सुरक्षित दूरी रखें क्योंकि यह आकाशीय बिजली के सुचालक बन सकते हैं। आकाशीय बिजली किसी विशेष वृक्ष प्रजाति को नहीं बल्कि ऊंचे एकाकी और खुले स्थान पर स्थित वृक्षों को विशेष रूप से प्रभावित करती हैं।

जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच

मानसून के दौरान गरज-चमक के समय खेतों और खुले क्षेत्रों में कार्य कर रहे किसानों, चरवाहों तथा ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऊंच एवं एकाकी वृक्ष विशेषकर नीलगिरी, पीपल, बरगद, ताड़, सागौन, नीम, इमली और अर्जुन—के नीचे शरण लेना अत्यंत जोखिमपूर्ण हो सकता है। आकाशीय बिजली किसी वृक्ष की प्रजाति को नहीं, बल्कि उसकी ऊंचाई, खुले स्थान में स्थिति और आसपास की परिस्थितियों के कारण आकर्षित होती है। इसलिए मौसम विभाग के अलर्ट का पालन करें, गरज-चमक शुरू होते ही खुले खेतों से सुरक्षित भवन में चले जाएं और कृषि उपकरणों से दूरी बनाए रखें। जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में लाइटनिंग रिस्क मैनेजमेंट को कृषि एवं कृषि वानिकी का अनिवार्य हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर