परेशान फूल उत्पादकों को सामान्य तापमान और बेहतर बारिश की आस
बिलासपुर। कलियां तो लगीं लेकिन पुष्पन बेहद कमजोर था। बेहतर की आस में दूसरी बार रोपे गए पौधों में लगे फूल झुलस गए। अब तापमान सामान्य होने एवं बेहतर बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं फूल उत्पादक किसान।
रथ यात्रा से शुरू हो रहे पूजा पर्व के लिए इस वर्ष भक्तों को फूलों की खरीदी बेहद महंगी पड़ेगी क्योंकि तेज धूप और देर रात तक बनी रही गर्मी ने फूलों को झुलसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मांग फिलहाल फूलों में भले ही कमजोर हो लेकिन पर्व के दौरान इसका असर कमजोर आवक और तेज कीमत के रूप में देखा जाएगा।

रिकॉर्ड 200 रुपए किलो
पूरे साल मांग में रहता है गेंदा। पश्चिम बंगाल के अलावा लोकल फूल बाड़ियों से भी गेंदा की आपूर्ति होती है लेकिन वर्षों बाद आवक में रिकॉर्ड 50 से 60 फ़ीसदी की कमी आई। बेहतर मांग को देखते हुए पहली बार रोपे गए पौधों ने तो मांग की आपूर्ति बनाए रखी लेकिन दूसरी बार रोपित पौधे तेज धूप और झुलसाने वाली तपिश के शिकार होकर खराब हो गए। परिणाम 200 रुपए किलो जैसी उच्चतम कीमत के रूप में सामने है।

कमजोर पुष्पन
ऑफ सीजन है गुलाब में लेकिन उत्पादक राज्यों के साथ स्थानीय फूल उत्पादक किसानों ने पहली बार देखा कि कलियां तो लगीं लेकिन पुष्पन बेहद कमजोर था। ऐसे में जन्मदिवस, शादी की सालगिरह और फूलों के गुलदस्तों में इसकी पहुंच 20 से 25 रुपए प्रति नग की दर पर ही हो पाई। सामान्य दिनों में गुलाब का फूल प्रति नग 10 से 15 रुपए में ही मिलता रहा है। इसमें अभी भी वृद्धि की आशंका बनी हुई है।

तेज कनेर और मोगरा भी
कनेर 5 रुपए में 5 या 7। मोगरा 10 से 15 रुपए माला। आंक के फूल 15 से 20 रुपए दोना। मांग का दबाव इसलिए क्योंकि यह तीनों सहज ही उपलब्ध हो जा रहे हैं लेकिन आगत सावन में कीमत बढ़ सकती है। संख्या कम की जा सकती है। असर उस बेल पत्ती पर अभी से देखा जाने लगा है, जिसका अर्पण आवश्यक माना गया है। यह फिलहाल 10 रुपए में 11 पर स्थिर है। कीमत और संख्या स्थिर रहने की संभावना है।