बिलासपुर। होती है सेल्फ लाइफ सूखे मेवों की भी। कुछ महीनो से लेकर लगभग 1 वर्ष तक लेकिन नमी, तापमान, ऑक्सीजन, प्रकाश और भंडारण जैसी स्थितियां सूखे मेवों की सेल्फ लाइफ को प्रभावित कर सकती हैं।

काजू, किशमिश, पिस्ता, बादाम, अखरोट, अंजीर, मखाना, खजूर और चिरौंजी के दिन आ गए हैं। रक्षाबंधन से लेकर दीपावली तक के लिए होलसेल और रिटेल काउंटरों ने तैयारी कर ली है लेकिन मौसम, तापमान की जैसी स्थितियां बनी हुई हैं, उसे देखकर चिंता में है मेवा बाजार क्योंकि गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ने की प्रबल आशंका है। विशेष तौर पर अखरोट को लेकर चिंता कुछ ज्यादा ही है क्योंकि सूखे मेवों में अखरोट की ही सेल्फ लाइफ सबसे कम मानी जाती है।

सबसे ज्यादा, सबसे कम

सूखे मेवों में काजू और किशमिश की सेल्फ लाइफ सबसे ज्यादा चार से छह माह की मानी जाती है। लेकिन इस उम्र के लिए नमी और गर्मी से बचाना होगा। बादाम और पिस्ता को क्रमशः 3 से 4 और 4 से 5 माह तक की अवधि के लिए सुरक्षित माना गया है लेकिन इस उम्र तक के लिए एयर टाइट पैक और ठंडी जगह की व्यवस्था करनी होगी। सुरक्षित भंडारण और ठंडी जगह आवश्यक होगी अखरोट के लिए। इस अवस्था में भी अखरोट 2 से 3 माह तक ही सुरक्षित रह पाता है।

यह कई महिने

खजूर की उम्र तय नहीं है। सही पैकिंग और नम स्थान पर भंडारण करने पर न केवल उम्र में वृद्धि की जा सकती है बल्कि गुणवत्ता में स्थिरता भी बनी रहती है। कई महीने तक रखा जा सकता है मखाना को लेकिन इसके लिए पूरी तरह सूखी जगह एवं एयर टाइट पैकिंग में रखना होगा मखाना को। ध्यान रखें यदि मेवों को कुछ दिनों या कुछ सप्ताह में उपयोग करना है तो पैकेट या कंटेनर से निकालने के कुछ समय बाद ही उपयोग में लाएं।

यह संकेत खराब होने का

असामान्य और तैलीय गंध और फफूंद। असामान्य रंग परिवर्तन। अत्यधिक चिपचिपापन कीट या उनके अवशेष का नजर आना। स्वाद हल्का कसैला या बेहद कड़वा। यह कुछ ऐसे संकेत हैं, जो मेवों के खराब होने की स्थिति स्पष्ट करते हैं। इसलिए इनके सेवन से बचने की सलाह वानिकी वैज्ञानिकों ने दी है।