राजमा, झुरगा और सोया बड़ी अब थाली में

बिलासपुर। दबाव में है राजमा लेकिन मांग में सबसे आगे चल रहा है झुरगा। स्थिर है डिमांड चना और मटर में पर सोया बड़ी आगे निकलने की राह पर है क्योंकि ग्रामीण उपभोक्ताओं की खरीदी इसमें अपेक्षाकृत ज्यादा है।

बारिश की मार के बाद सब्जी बाड़ियों की लगभग 50 से 60 फीसदी प्रजातियां डूब में आ चुकीं हैं। इससे हरी सब्जियों की कीमत क्रयशक्ति से बाहर जा चुकी है। इसलिए सूखी सब्जियों के विकल्प अब मांग और खरीदी के दबाव में आ चुके हैं। इनमें राजमा,झुरगा के बाद सोया बड़ी की मांग सबसे ज्यादा है।

राजमा, झुरगा और सोया बड़ी

क्रयशक्ति के भीतर ही है राजमा जिसमें प्रति किलो कीमत 120 से 160 रुपए बोली जा रही है। खरीदी में दूसरे क्रम पर झुरगा है।लाल झुरगा 120 से 140 रुपए और सफेद झुरगा 100 से 120 रुपए पर स्थिर है। होटल, ढाबों तथा स्ट्रीट फूड काउंटरों की मांग बरकरार है चना और मटर में। चना खैरी 75 से 100 रुपए तथा चना गुलाबी 100 से 120 रुपए किलो पर स्थिर है। जबकि सफेद मटर 50 से 70 तथा मटर हरा 80 से 120 रुपए किलो जैसी कीमत को क्रयशक्ति के भीतर माना जा रहा है।

अच्छी खरीद मूंग, उड़द में

घरेलू उपभोक्ताओं में ग्रामीण क्षेत्र की उपभोक्ता मांग से मजबूत है खड़ा मूंग और खड़ी उड़द। इसमें मूंग 90 से 140 रुपए किलो और उड़द 100 से 140 रुपए किलो पर स्थिर है। सूखी सब्जियों में सोयाबीन की बड़ी अब सूखी सब्जियों की उपलब्ध सामग्रियों से कहीं ज्यादा है क्योंकि ग्रामीण उपभोक्ता मांग इसमें सबसे आगे है। इसमें 80 से 120 रुपए किलो जैसी क्रय कीमत का योगदान ज्यादा है।

क्रय शक्ति से बाहर हरी सब्जियां

टमाटर भले ही 20 से 25 रुपए किलो जैसी कीमत पर राहत दे रहा हो लेकिन पत्ता और फूलगोभी क्रमशः 40 और 80 रुपए किलो पर मजबूत है। कुम्हड़ा, लौकी, तुरई, भिंडी 30 से 40 रुपए किलो पर स्थिर है। लेकिन बैंगन, करेला में 40 से 50 रुपए किलो जैसी कीमत को ज्यादा माना जा रहा है। खेक्सी, मुंनगा, कोचई में कीमत भी ज्यादा मानी जा रही है। भाजी फसलों में लाल, पालक, मेथी, सहित अन्य भी तेज है।