भाटापारा। न्यूनतम 1 फीट, न्यौछावरी 250 रुपए। अधिकतम 8 फीट, न्यौछावरी 25000 रुपए। भक्त और समितियां निर्माण एवं विक्रय स्थल पर पहुंचने लगीं हैं। नया बदलाव यह कि इस बार रुझान मध्यम ऊंचाई वाली प्रतिमा को लेकर ज्यादा है।
14 सितंबर से शुरू हो रहा है गणेश उत्सव। निर्माण स्थल पर आकार ले चुके हैं विघ्न विनाशक। तैयार होने लगी हैं समितियां। तैयार हैं भक्त लेकिन इस बार स्थापना पर अपेक्षाकृत कुछ ज्यादा न्यौछावरी देनी होगी क्योंकि मिट्टी, रंग और स्वरूप देने का काम महंगा हो चुका है।

निर्माण सामग्री तेज
गंगा मिट्टी और कोलकाता मिट्टी की 20 किलो की पैकिंग इस बरस मूर्तिकारों ने 300 रुपए से 325 रुपए में खरीदी। बीते गणेश पर्व के पूर्व इसकी खरीदी 250 से 275 रुपए में की गई थी। आवश्यक रंग भी 5 से 7% महंगे हो गए हैं। श्रमिकों की प्रतिदिन मजदूरी भी 700 रुपए देनी पड़ी। इसमें 200 रुपए की बढ़ोतरी मूर्तिकारों ने इसलिए स्वीकार की क्योंकि अतिरिक्त सावधानी का काम है कच्ची मिट्टी को आकार देना।

न्यूनतम और अधिकतम
स्थापना स्थल को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम ऊंचाई 1 फीट और अधिकतम ऊंचाई 8 फीट रखी गई। समितियों और भक्तों की क्रय शक्ति का भी ध्यान था। इसलिए न्यूनतम न्यौछावरी 250 रुपए रखी गई जबकि अधिकतम न्यौछावरी 25000 रुपए तय की गई है। इसमें फुटकर विक्रेता संस्थानों को रियायत की व्यवस्था मूर्तिकारों ने दी हुई है क्योंकि इससे ही स्थापना स्थलों तक पहुंच आसान होती है।

पहुंचने लगे यहां
श्री गणेश पर्व के लिए संस्थानें न केवल तैयार हैं बल्कि खरीदी भी चालू कर दी हैं। काउंटरों में छोटी प्रतिमाओं को रखने के बाद अब मध्यम ऊंचाई वाली प्रतिमाओं के लिए जगह तैयार की जा रही है, तो बड़ी प्रतिमाओं के लिए सीधे निर्माण स्थल जाने की सलाह दी जा रही है। रुझानों से संकेत बेहतर के मिल रहे हैं।