बिलासपुर। कमरछठ दो सितंबर को। मांग बेहद धीमी है पसहर चावल में। शक्कर भले ही स्थिर हो रही हो लेकिन गुड़ में बढ़त अभी भी जारी है।

कमजोर मांग का शायद पहले से ही अनुमान था इसलिए खुदरा- बाजार ने कमरछठ से जुड़ी सामग्रियों का भंडारण बेहद सतर्कता के साथ किया था। अनुमान अब सही साबित होने लगा है क्योंकि पसहर चावल में खरीदी औपचारिक नजर आ रही है।

बेहद गर्म पसहर चावल

सिर्फ कमरछठ पर्व पर ही मांग में रहता है पसहर चावल। इसलिए इसकी व्यावसायिक खेती नहीं करते किसान।शार्टेज और तेज कीमत इसीलिए बनती है लेकिन इस बरस इसकी प्रति किलो कीमत 150 से 200 रुपए बोली जा रही है। इसे बेहद तेज माना जा रहा है। इसलिए औपचारिक खरीदी कर रहे हैं उपभोक्ता। इसके बावजूद पसहर चावल विक्रेता संस्थानें कीमत कम करने के लिए तैयार नहीं हैं।

अब गुड़ में उबाल

शक्कर की कीमतों पर नियंत्रण के उपाय के बाद अब गुड़ की कीमतें उपभोक्ताओं को हैरान और परेशान कर रहीं हैं क्योंकि प्रति किलो कीमत 75 से 85 रुपए पर जा पहुंची है। यह भी तब, जब अपने छत्तीसगढ़ के ऐसे पारंपरिक पर्व एवं त्यौहार चालू हो चुके हैं, जिनमें गुड़ से बनी खाद्य सामग्रियों को होना अनिवार्य माना जाता है। कीमत में और बढ़त की आशंका इसलिए व्यक्त की जा रही है क्योंकि गुड़ का उत्पादन बंद होने की खबरें आने लगीं हैं।

औपचारिक खरीदी इसमें भी

कमरछठ पूजा के लिए मिट्टी का दीया और चुकिया भी खरीदा जाता है। माटी कला बोर्ड भले ही प्रोत्साहन दे रहा हो लेकिन कुम्हारों की नई पीढ़ी दूर हो रही है इसे व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए। इसलिए मांग के अनुरूप मिट्टी का दीया और चुकिया की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि आगत कमरछठ पर्व के लिए 20 रु में 6 नग दीया की खरीदी की जा सकेगी जबकि 3 रुपए प्रति नग जैसी कीमत पर चुकिया की उपलब्धता तय की जा सकेगी।