भाटापारा। छिंद झाड़ू 20 से 25 रुपए। फूल झाड़ू 60 से 150 रुपए। खरहरा 50 रुपए। मांग के दिन हैं लेकिन उत्पादन धीमा है। इसलिए कीमत में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं।

करीब आ रहे हैं पर्व और त्यौहारों के दिन। बारिश भी खूब। ऐसे में स्वच्छता अहम है लेकिन झाड़ू, बुहारी और खरहरा के दाम जिस गति से बढ़ रहे हैं, उससे मांग में आनुपातिक गिरावट देखी जा रही है।

बांस और बारिश

10 से 20 रुपए की वृद्धि के बाद क्वालिटी बांस 170 से 180 रुपए पर पहुंचा हुआ है। सीमित मात्रा में खरीदी कर रहीं बांस शिल्प ईकाइयां अब बारिश के थमने की प्रतीक्षा कर रहीं हैं क्योंकि यह स्थिति नियमित उत्पादन में बाधा डाल रहीं हैं। इसीलिए झाड़ू और बुहारी में मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो रही है। यही वजह है कि दोनों की कीमत बढ़ी हुई है।

नियमित मांग बुहारी में

फूल झाड़ू 60 से 150 रुपए नग। छिंद झाड़ू 20 रुपए नग पर ठहरी हुई है लेकिन खरहरा मांग के दबाव में है। भरपूर भंडारण की वजह से यह 50 रुपए नग पर स्थिर है। इसलिए खरीदी जारी है। बढ़ती मांग की संभावना को देखते हुए उत्पादन करने वाली इकाइयों से अग्रिम सौदे किए जा रहे हैं लेकिन अग्रिम सौदे को लेकर अनिच्छुक हैं इकाइयां क्योंकि समय पर आपूर्ति में बारिश बड़ी बाधा बन रही है।

बेहद ठंडा है यह

सूपा 120 से 150 रुपए, पर्रा 150 से 300 रुपए और टोकनी 50 से 200 रुपए पर स्थिर है। तीज पर्व पर निकलती रही है खरीदी लेकिन प्लास्टिक के सूपा, पर्रा और टोकनी के आने के बाद मांग में जोरदार गिरावट आ रही है। यह गिरावट लंबी अवधि तक बने रहने की धारणा को देखते हुए बांस शिल्प बनाने वाली कोटा बेलगहना की इकाइयों ने उत्पादन की मात्रा घटानी शुरू कर दी है।