बिलासपुर। बढ़ती लागत, घटता लाभांश और स्थिर मांग। परिचालन से बाहर जा चुकी हैं प्रदेश की 80 फीसदी बेकरी यूनिटें।शेष 20 फीसदी इकाइयों में कभी भी ताले लग सकते हैं।

शार्टनिंग, खाद्य तेल की कीमतें अब क्रय शक्ति से बाहर हो चली हैं।अन्य सामग्रियों की कीमतें दिन-ब-दिन बढ़ रही है। जबकि तैयार उत्पादन की कीमत और उपभोक्ता मांग स्थिर है। वजन कम करने या संख्या घटाने जैसे उपाय भी काम नहीं आए। इसलिए उत्पादन घटाने या बंद किए जाने जैसे फैसले विवशता में लिए जाने लगे हैं।

शार्टनिंग और शक्कर का झटका

130 से 135 रुपए किलो थी शार्टनिंग की कीमत। बेलगाम तेजी के बाद अब यह 170 से 180 रुपए किलो पर जा पहुंची है।इसी तरह शक्कर 40 से 45 रुपए किलो की जगह 60 से 65 रुपए किलो पर अब भी मजबूत है। खाद्य तेलों की पेकिंग में घटती मात्रा और बढ़ी कीमत ने भी उत्पादन बंद करने जैसे फैसले लेने के लिए विवश किया हुआ है। अन्य राॅ मटेरियल के दाम पहले से ही बढ़े हुए हैं।

साथ छोड़ा बाजार ने भी

कच्ची सामग्री की बढ़ती कीमत को देखकर बेकरी प्राॅडक्ट की पेकिंग में सामग्री की संख्या या वजन कम करने जैसे प्रस्ताव को बाजार ने सिरे से खारिज कर दिया।कीमत बढ़ाने जैसे विकल्प को खुदरा बाजार का साथ नहीं मिला। इसलिए उत्पादन की मात्रा घटाने जैसे उपाय अपनाए गए लेकिन अब यह भी काम नहीं आ रहा है क्योंकि उपभोक्ता मांग अपनी जगह पर स्थिर है।

80 फीसदी ईकाइयां बंद

प्रदेश में छोटी- बड़ी मिलाकर करीब 4000 से 5000 बेकरी यूनिटें हैं। इनमें से 80 फीसदी इकाइयों में उत्पादन पूरी तरह बंद हो चुका है।शेष 20 फीसदी यूनिटें कभी भी परिचालन से बाहर हो सकतीं हैं क्योंकि बढ़ती लागत और घटते लाभांश के बीच संचालन अब क्षमता से बाहर हो चुका है। ऐसे में ईकाइयों में कार्यरत प्रशिक्षित श्रमिक वापसी के लिए तैयार है।