महामाया देवी मंदिर परिसर स्थित गेट पर हुए निजी विवाद के आगे का क्या है सच
करनी चाहिए जिला और पुलिस प्रशासन को जांच
रतनपुर। क्या ये सच है कि तालाब जाने वाले आम निस्तारी के 10×10 वर्ग फीट सरकारी जमीन के अवैध कब्जे को बचाने दो पक्षों के निजी विवाद को साम्प्रदायिक रुप देने का षड़यंत्र हुआ ? इस विवाद की आंच सिद्ध शक्तिपीठ श्री महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट रतनपुर से होते हुए राजनांदगांव के उद्योगपति बहादुर अली की कंपनी के तेल तक पहुंच गई। हिंदुत्ववादी संगठनों और कथित सर्व हिंदु समाज रतनपुर के निशाने पर सिद्ध शक्तिपीठ श्री महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट रतनपुर आ गया। मंदिर ट्रस्ट कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन तक हो गया। जिला और पुलिस प्रशासन को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए। और पता लगानी चाहिए कि पीएमओ में हुई शिकायत के बाद पटवारी प्रतिवेदन और पंचनामा मिलने के बाद भी तहसीलदार रतनपुर अवैध कब्जे को हटाने कोई कार्रवाई अब तक क्यों नहीं की है। सिद्ध शक्तिपीठ श्री महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट रतनपुर के विरोध के पीछे का सच क्या है ? जाति, धर्म और तेल की धार में कौन किसके संरक्षण में फिसल रहा !
बीते 22 अगस्त महामाया मंदिर परिसर के गेट पर दो पक्षों में चोरी की घटना को लेकर हुई गाली-गलौज मारपीट की घटना को साम्प्रदायिक रंग देने की घटना को लेकर शहर में चर्चाओं की चौपटी में रोचक और दिलचस्प तथ्य परोसे जा रहे हैं। अगर ये तथ्य सत्य है तो जिला और पुलिस प्रशासन को इसकी गंभीरता से तथ्यात्मक जांच कर साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाले दोषी लोगों के कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

मामला शुरू होती है नौ महीने पहले 09 फरवरी 2026 को। बड़ी संख्या में दस्तखत कर शहर के नागरिकों ने कलेक्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ को ज्ञापन सौंपकर बताया कि महामाया देवी रतनपुर धार्मिक व पुरा पर्यटन नगरी है, जहां रोज हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु माता महामाया मंदिर में दर्शन करने आते है। महामाया मंदिर के समीप ही नगर पालिका परिषद रतनपुर के स्वामित्व की कलपेसरा तालाब हैं । जिसका नगर पालिका परिषद रतनपुर द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर सौदंर्गीकरण कराया है। इसमें नौका विहार का ठेका में देकर संचालन किया जाता है। तालाब के चारो तरफ नगर पालिका परिषद के द्वारा बाऊण्ड्रीवाल कर लोहे के तीन 3 दरवाजा लगाकर आम रास्ता बनाया है। इसमें दर्शनार्थी, आम नागरिक और मोहल्लावासी आना जाना निस्तारी करते है। इसके मुख्य दरवाजे पर राजू शर्मा निवासी रतनपुर ने लोहे के एंगल से अवैध कब्जा कर पुस्तक दुकान खोल कर रास्ता को बंदकर कर दिया है जिस इस रास्ते पर आवाजाही बंद है। नागरिकों ने बताया तालाब के दोनो तरफ दुकान लगता है। रास्ता बंद होने से आवाजाही बंद है और छोटे दुकानदारों के व्यवसाय पर बहुत बुरा असर हो रहा है, आर्थिक क्षति हो रही है। मुहल्ले वासियों की निस्तारी बंद हो गई। नागरिकों ने मौका जॉच कर पुस्तक दुकान को तत्काल हटाकर रास्ता बहाल करने निवेदन किया। इस पर कोई आज तक कार्रवाई नहीं हुई।

पीएमओ के पत्र जांच हुई अब तक कार्रवाई नहीं
नागरिकों की शिकायत पर कलेक्टर ने कार्रवाई की। फिर इस मामले की शिकायत पीएमओ में नागरिकों ने की। पीएमओ के पत्र क्रमांक PMOPG/D/2026/0045768 पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोटा ने ज्ञापन क्रमांक 940/वाचक-1/अ.वि.अ. /2026 कोटा दिनांक 19/5/2026 जारी कर रतनपुर तहसीलदार जांच के लिए निर्देशित किया। इस पर तहसीलदार रतनपुर ने मौके की जांच कर पटवारी से पंचनामा प्रतिवेदन मंगाया। पटवारी ने मौके की जांच कर प्रतिवेदन और पंचनामा तहसीलदार रतनपुर को सौंप दी है। इस पर अभी कार्रवाई नहीं की गई है ।

तालाब पार की 10×10 फीट सरकारी जमीन पर है दुकान
पटवारी हल्का नंबर 12 रतनपुर के पटवारी ने प्रतिवेदन में बलताया है कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोटा के आदेशानुसार मौके का निरीक्षण किया गया। आवेदित स्थल ग्राम रतनपुर स्थित भूमि खसरा नंबर 3351/1 रकबा 0.615 हेक्टेयर भूमि शासकीय घास मद में दर्ज पार तालाब है जिसके अंश भाग पर गीता प्रेस पुस्तक दुकान 10×10 वर्गफीट में संचालित है। उक्त वाद स्थल के दक्षिण दिशा में महामाया मंदिर जाने के लिए रास्ता बना हुआ है। उत्तर दिशा में तालाब आने-जाने के लिए पूर्व में गेट रहा था किन्तु वर्तमान में बंद है। तालाब जाने के लिए वर्तमान में 3 गेट मौजूद है।

कब्जेदार को भी मिला मंदिर ट्रस्ट की नोटिस
बीते 22 अगस्त की घटना के सभी आरोपी पक्षकारों को मंदिर परिसर का माहौल दूषित करने के लिए बेदखली का नोटिस मिला। इसमें तालाब पार की जमीन पर बने गेट के सामने का कब्जाधारी भी शामिल हैं। विवाद के बाद मिले नोटिस और दुकान से बेदखल हो जाने की आशंका से विवाद को नया मोड़ देने की चर्चा है। तभी तो चोरी की घटना को लेकर दो पक्षों में शुरू हुआ विवाद को साम्प्रदायिक रुप देने की कोशिश हुई। जिसकी परिणति विभिन्न संगठनों और कथित हिंदु समाज रतनपुर के द्वारा सिद्ध शक्तिपीठ श्री महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट रतनपुर का घेराव और बहादुर अली के तेल के विरोध के रूप में हुआ। इस विवाद से तो दोनों का दूर दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। फिर कथित संगठन महामाया मंदिर ट्रस्ट के विरोध में आ गए। इस पूरे घटनाक्रम में कब्जाधारी की ही बड़ी भूमिका होने की चर्चा है। तो कुछ तो है जिसकी पर्दादारी है। जिला और पुलिस प्रशासन को समय रहते पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जानी चाहिए जिससे अमन का परचम लहराता रहे।