जलीय पक्षियों के लिए आवश्यक हैं दोनों

बिलासपुर। संकट में हैं सारस, बगुले, बत्तख और टिटहरी जैसे जलीय पक्षी। करना होगा विकास आर्द्र भूमि का। बनानी होगी सूखे वृक्षों के संरक्षण के लिए विशेष कार्य योजना क्योंकि जलीय पक्षियों के लिए आवश्यक यह दोनों तेजी से प्राकृतिक परिदृश्य से खत्म हो रहें हैं।

सिमटती आर्द्र भूमि और सूखे वृक्षों की तेजी से कम होती संख्या अब पक्षी वैज्ञानिकों में चिंता का विषय बन रही है क्योंकि इन दोनों की ताजा स्थितियां जलीय पक्षियों के लिए अस्तित्व संकट की वजह बन रहीं हैं। कारगर और प्रभावी कार्य योजना पर गंभीरता के साथ काम करने की जरूरत समझी जा रही है।

आर्द्र भूमि क्या और क्यों ?

आर्द्र भूमि वह क्षेत्र है, जिनमें पूरे साल जल जमाव रहता है। इनमें तालाब, झील, जलाशय, नदी तट, कृत्रिम जल ग्रहण क्षेत्र और दलदल मुख्य हैं। यह सभी जलीय और स्थलीय पारिस्थितिकी के बीच सेतु का काम करते हैं। पक्षियों के लिए इनका महत्व इसी से जाना जा सकता है कि इन्हीं क्षेत्रों से पक्षियों को भोजन उपलब्धता सुनिश्चित होती है। यह सब, अब शहरीकरण औद्योगिकीकरण की वजह से सिमटते जा रहे हैं। इससे पक्षियों का आवास खत्म हो रहा है।

संरक्षण मांग रहे यह वृक्ष

भूख मिटाते हैं जामुन और बरगद के वृक्षों में लगने वाले फल पक्षियों की लेकिन तेजी से खत्म हो रहे हैं यह दोनों। पीपल और अर्जुन के वृक्ष घने होते हैं इसलिए पक्षी इनमें अपने स्थाई घोसला बनाते हैं। नम भूमि से यह प्रजातियां भी गायब हो रहीं हैं। कदंब और करंज छाया देने वाले वृक्षों की सूची में सबसे आगे हैं। विश्राम और छाया देने वाली यह दोनों प्रजातियां भी संरक्षण मांग रहीं हैं। इमली, आंवला और बेर के वृक्षों का भी संरक्षण आवश्यक माना जा रहा है।

जरूरत वनस्पति प्रबंधन की

आर्द्र भूमि में संतुलित वनस्पति प्रबंधन बेहद आवश्यक है क्योंकि यह भी प्रवासी और स्थानीय पक्षियों को आहार उपलब्ध करवाते हैं। पक्षी वैज्ञानिकों ने जलीय पौधों में कमल, सिंघाड़ा और हाइड्रिला को एकदम सही माना है। वनस्पति के रूप में सरकंडा और नरकट को उचित पाया है। जबकि तटीय घास के रूप में कांस और दूब ऐसी प्रजातियां हैं, जो पक्षियों को अपनी ओर आकर्षित करतीं हैं।

वृक्ष है प्राकृतिक संतुलन की रीढ़

आर्द्रभूमि के आसपास उगने वाले वृक्ष पक्षी संरक्षण, जल संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन की रीढ़ होते हैं। अर्जुन, जामुन, कदम्ब, फाइकस समूह, करंज और बाँस जैसी प्रजातियाँ आर्द्रभूमि को जीवंत बनाए रखती हैं। सही वृक्ष चयन और वैज्ञानिक रोपण से आर्द्रभूमियाँ पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बन सकती है।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन बिलासपुर