बलौदाबाजार। अस्वच्छ और असुरक्षित वातावरण में संचालन। धनकुट्टी, आटा चक्की, मसाला और गीली दाल पीसने वाली छोटी ईकाइयों को भी करवाना होगा रजिस्ट्रेशन।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन के तेवर सख्त होते नजर आ रहे हैं। पहली बार जांच और कड़ी कार्रवाई ऐसे कारोबारी क्षेत्र में किए जाने की योजना है, जिसे छोटा कारोबार जानकर अब तक रियायत दी जाती रही है।

असुरक्षित संचालन

छोटा सा कमरा। दरवाजे के करीब ही मशीन। संचालन के दौरान निकलता कोढ़ा के भंडारण के सुरक्षित उपाय नहीं। फलतः डस्ट फैलती है। होना चाहिए एग्जॉस्ट फैन, लगाना चाहिए ऑपरेटर को मास्क ताकि सेहत सुरक्षित रहे। निकल रही चावल की गुणवत्ता प्रभावित होने की पूरी आशंका लेकिन बेफिक्र हैं हॉलर संचालक।

हर कोना अस्वच्छ

हॉलर मिलों जैसी ही स्थितियां हैं मसाला और आटा चक्कियों की। धूल- धूसरित दीवार,मकड़ी के जालों से भरी छत और कोने। यह दृश्य बताते हैं कि सुरक्षा के हर जरूरी उपायों की खुलकर अनदेखी कर रहीं हैं मसाला और आटा चक्कियां। प्रभावित हो सकती है खाद्य सामग्री की गुणवत्ता। ऑपरेटरों की सेहत पर गहरा असर डाल सकती है मास्क, ग्लव्स और गम बूट का नहीं होना।

लापरवाही यहां भी

गीली दाल पीसने वाली संस्थानें कम ही हैं लेकिन जो हैं, वह भी खाद्य सुरक्षा के इंतजाम को लेकर गंभीर नहीं हैं। गीलापन हमेशा बना रहता है इसलिए दाल पीसने वाले उपकरणों पर जमी धूल, काई का रूप ले चुकी नजर आती है। स्वच्छता का अभाव हर कोने में नजर आता है। अनिवार्य हर सुरक्षा मानक का यह क्षेत्र भी उल्लंघन कर रहा है।

हॉलर, मसाला, आटा चक्की और गीली दाल पीसने वाली संस्थानों को नियमानुसार रजिस्ट्रेशन नंबर लेना आवश्यक है। खाद्य सुरक्षा मानक के पालन को लेकर लापरवाही की शिकायतों को देखते हुए जांच की योजना है।

  • अक्षय सोनी, अभिहित अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, बलौदा बाजार