बंपर फसल और भरपूर आवक के बाद तेजी पर ब्रेक

रायपुर। कोरोना काल में इमली उत्पादन का रिकॉर्ड टूट सकता है। बेहतर फसल और भरपूर आवक के बीच, कीमत ने गिरावट का जो रास्ता पकड़ा, वह अब 2200 सौ रुपए क्विंटल पर आकर ठहर चुका है। अब आगे स्थिरता का रुख बने रहने की संभावना बनती दिखाई दे रही है। वनोपज से धनी अपना छत्तीसगढ़ हमेशा की तरह इस वर्ष भी देश की इमली की घरेलू मांग पूरी करने वाला इकलौता राज्य बना रहेगा क्योंकि मौसम का पूरा साथ इमली को मिला। अब इमली का साथ उन संग्राहकों को मिल रहा है, जो संग्रहण कर इसकी बिक्री थोक बाजार के अलावा साप्ताहिक हाट बाजार में करते हैं। इसके भाव ने मध्यप्रदेश को भी आमंत्रण दे दिया है, लिहाजा एमपी से भी इमली की भरपूर आवक होने लगी है।


है दबदबा केशकाल का

अपने यहां लगभग हर जिले में इमली के पेड़ हैं लेकिन गुणवत्ता के मानक पर केशकाल के जंगल पूरी तरह खरा उतरते हैं। स्वाद, रंग, गुणवत्ता के दम पर केशकाल की इमली से अब तक कोई भी जिला आगे नही निकल पाया है। यह बढ़त केशकाल ने चालू बरस में भी बना रखी है। यहां की इमली को अब भी 100 से 200 रुपए ज्यादा कीमत दी जा रही है।
आवक मध्य प्रदेश से भी


आवक मध्य प्रदेश से भी

छत्तीसगढ़ की इमली का सबसे बड़ा उपभोक्ता राज्य, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र हैं। यहां की मांग निकलने में अभी कुछ माह का समय शेष है। स्टॉकिस्टों की लिवाली में, इन राज्यों की भी हिस्सेदारी बढ़ती देख, पड़ोस के राज्य मध्यप्रदेश से इमली की आवक होने लगी है। इसे भी संतोषजनक भाव मिल रहे हैं, इसलिए कीमत में ज्यादा तेजी नहीं आ सकी है। जिसकी संभावना फसल के पहले जताई जा रही थी।


कीमत और उत्पादन

प्रदेश में इस बरस मौसम की मेहरबानी से इमली का उत्पादन लगभग 10000 टन को पार कर सकता है। यह बीते सीजन की तुलना में कुछ ज्यादा है। रही बात भाव की तो इस समय बीज वाली इमली 2200 रुपए और बिना बीज वाली इमली 4800 रुपए क्विंटल पर आ गई है। कीमत में अब और गिरावट के आसार नहीं हैं।

इमली की नई फसल बाजार में पहुंचने लगी है। उत्पादन जोरदार है। कीमत में कमी जरुर देखी जा रही है लेकिन स्टाकिस्टों की खरीदी से बाजार में करंट की उम्मीद है।

  • सुभाष अग्रवाल, संचालक, एस पी इंडस्ट्रीज, रायपुर