भाटापारा। रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले भी महंगाई की जद में आ चुके हैं क्योंकि जरूरी सामग्रियां काष्ठ, पैरा, वस्त्र और शस्त्र के साथ पटाखों की कीमत बढ़ चुकी है।
मूर्तिकार चैतूराम रामप्रसाद, दशानन और मेघनाथ के साथ कुंभकरण के पुतले को आकर दे रहे हैं। वह बताते हैं कि इस बार 25 फ़ीसदी की वृद्धि हो चुकी है क्योंकि आवश्यक सभी सामग्रियों की कीमत तेज है।

लगती हैं यह सामग्रियां
बांस प्रति नग बीते बरस 40 रुपए में मिल रहा था, उसकी कीमत इस साल 70 से 80 रुपए प्रति नग पर जा पहुंची है। पैरा भले ही कम लगता हो लेकिन कीमत इसमें भी ज्यादा बोली जा रही है क्योंकि सीधी और लंबाई वाले पैरा की जरूरत होती है। वेशभूषा के लिए आवश्यक कपड़े भी महंगे हो चले हैं। इसी तरह पटाखे भी तेज हैं। अस्त्र-शस्त्र भले ही लकड़ियों के होते हैं लेकिन महंगे यह भी हो चुके हैं।

ऊंचाई और कीमत
दशानन 30 फीट। कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले क्रमशः 20-20 फीट के होंगे। कीमत के सवाल पर मूर्तिकार चैतूराम रामप्रसाद बताते हैं कि पुतले बनाने वाली सामग्रियों की कीमत और कार्यबल को दी जा रही मजदूरी बढ़ी हुई है, इसलिए इन तीनों का सेट 1 लाख रुपये में ले सकेंगी समितियां। ऊंचाई इसलिए सामान्य रखी हुई हैं ताकि दहन स्थल तक परिवहन और स्थापना में दिक्कत ना हो। महंगे होने के बावजूद रुझान बढ़िया है।

छोटे पुतले इस बार नहीं
मांग में रहते हैं छोटे दशानन लेकिन इस बरस ऑर्डर नहीं मिले क्योंकि परीक्षाओं की तारीखें हैं। इसलिए डिमांड लगभग शून्य है। वैसे भी रेडीमेड पुतले आने लगे हैं इसलिए निर्माण नहीं किए गए।
