असम और पश्चिम बंगाल तक विस्तार पूरा
भाटापारा। असम और पश्चिम बंगाल के साथ अब संपूर्ण भारत। प्रयास अब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रवेश की। इसलिए संभावित देशों की खान-पान शैली का अध्ययन कर रहीं हैं, पोहा उत्पादन करने वाली ईकाइयां।
अब असम और पश्चिम बंगाल भी छत्तीसगढ़ में उत्पादित पोहा का उपभोक्ता राज्य बन गया है। इसके साथ संपूर्ण भारत का लक्ष्य करीब- करीब पूरा हो चला है। इसलिए गुणवत्ता के हर मानक पर कड़ी नजर रखी जा रही है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार के लिए संभावना वाले देश की खोज के प्रयास चालू हो चले है ।
महाराष्ट्र, कर्नाटक पूरे साल
छत्तीसगढ़ के भाटापारा में उत्पादित पोहा के सबसे बड़े उपभोक्ता राज्य महाराष्ट्र और कर्नाटक अब पूरे साल खरीदी कर रहें हैं। सीजन हो या ऑफ सीजन, एक समान रहती है पोहा में, इन दोनों राज्यों की मांग और खरीदी। मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश का भी पूरा साथ मिल रहा है। इसके अलावा बिहार और उड़ीसा से भी भरपूर मांग निकलने लगी है।

अब असम और पश्चिम बंगाल भी
सीमावर्ती और उपभोक्ता राज्यों के जरिए छत्तीसगढ़ का पोहा अब असम और पश्चिम बंगाल भी भेजा जाने लगा है। मात्रा भले ही अपेक्षा से थोड़ा कम है लेकिन रुझान के संकेत उत्साह बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं। इसके साथ पूर्वोत्तर राज्यों से भी सीमित मात्रा में छत्तीसगढ़ के पोहा की मांग निकली हुई है।
कदम अंतर्राष्ट्रीय बाजार की ओर
संपूर्ण भारत का लक्ष्य करीब- करीब पूरा होता देखकर अब छत्तीसगढ़ की पोहा उत्पादक ईकाइयां अंतर्राष्ट्रीय बाजार की ओर कदम बढ़ा रहीं हैं। पहली कोशिश ऐसे पड़ोसी देशों पर ध्यान देने की है, जिनकी खान-पान की शैली अपने देश से मिलती- जुलती है। फिलहाल इस पर ही गंभीरता से अध्ययन किए जाने की खबर है।

ऐसे हैं भाव
सीजन ने दस्तक दे दी है। ऐसे में मोटा पोहा 3800 से 4400 रुपए क्विंटल। पतला पोहा 4500 से 4700 रुपए क्विंटल और दगड़ी में भाव प्रति क्विंटल 4000 से 4300 रुपए बोले जा रहे है। धारणा ऐसे ही बने रहने की है क्योंकि उत्पादन और मांग सामान्य स्तर पर ही है।
फिलहाल अध्ययन
संपूर्ण भारत के लक्ष्य के करीब पहुंचने के बाद पोहा के लिए संभावित अंतर्राष्ट्रीय बाजार की तलाश है। इस पर गंभीरता के साथ अध्ययन कर रहे हैं।
–रंजीत दावानी, अध्यक्ष, पोहा मुरमुरा निर्माता कल्याण समिति, भाटापारा
