तैयार हो रहीं रिग मशीनें
भाटापारा। फिलहाल प्रति फीट बोर खनन की दर स्थिर है लेकिन जिले के पलारी और बलौदा बाजार ब्लॉक का भूजल स्तर इस दर को बढ़ा सकता है क्योंकि यह दोनों क्षेत्र कम भूजल उपलब्धता वाले क्षेत्र माने जाते हैं।
समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी अंतिम दौर में पहुंच रही है। इसी क्रम में आगामी खरीफ की तैयारी आहिस्ता-आहिस्ता शुरू होने लगीं हैं। तैयारी की सूची में नया बोर खनन और पुराने बोर की गहराई बढ़ाने जैसी आवश्यकता पहले नंबर पर है। खनन की दरों की जानकारी लेने पहुंच रहे किसानों को जो दर बताई जा रही है, उसके मुताबिक यह 80 रुपए प्रति फीट पर स्थिर है।

यहां इसलिए ज्यादा गहराई
बलौदा बाजार और पलारी ब्लाक। निजी खनन एजेंसियों के मुताबिक इन दोनों विकासखंड में भूजल की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता अपेक्षाकृत कुछ ज्यादा ही गहराई में हो पाती है। ऐसे में अनिश्चितताओं की वजह से यहां 500 से 600 फीट गहराई तक बोर खनन करवाए जाते हैं। प्रारंभिक पूछताछ को देखते हुए माना जा रहा है कि सर्वाधिक खनन के लिए बुकिंग यहीं से होगी।
ध्यान में यह दोनों भी
भाटापारा और सिमगा। जिले के यह दोनों विकासखंड भी खनन एजेंसियों की नजर में हैं। घरेलू जरूरत को पूरी करने के लिए बोर खनन की संख्या इस वर्ष बढ़ सकती है क्योंकि आवासीय और व्यावसायिक परिसरों के निर्माण खूब हो रहे हैं। सबसे अहम यह है कि भूजल दोहन को लेकर यह दोनों विकासखंड अपेक्षाकृत न केवल सतर्क हैं बल्कि जागरूक भी हैं। लिहाजा पूछताछ अपेक्षाकृत कम ही है।

कहां कितनी गहराई ?
निजी खनन एजेंसियों की मानें, तो पलारी और बलौदा बाजार विकासखंड में बोर खनन की गहराई लगातार बढ़ रही है। यह दोनों बीते दो बरस से 300 से 600 फीट तक की गहराई वाले बोर का खनन करवा रहें हैं। जबकि भाटापारा और सिमगा विकासखंड क्षेत्र में यह गहराई 300 से 400 फीट पर स्थिर है। इसमें बढ़त के आसार इसलिए भी नहीं हैं क्योंकि भूजल के दोहन को लेकर यह दोनों बेहद सतर्क हैं।
स्थिर है खनन की दर
प्रति फीट खनन की दर 80 रुपए पर स्थिर है। गहराई की बात करें, तो पलारी और बलौदा बाजार क्षेत्र में 500 से 600 फीट तक खनन करवाया जाता है। भाटापारा और सिमगा क्षेत्र में यह काम 300 से 400 फीट पर स्थिर है।
– सुनील दुबे, दुबे बोरवेल्स, भाटापारा

