ठेठरी अउ खुरमी घलाउ भारी रास आथे…



भाटापारा। खूब पसंद किया जा रहा है अईरसा। एकदम अनूठा है ठेठरी और खुरमी का स्वाद। तीनों छत्तीसगढ़ी व्यंजन जिस तेजी से जगह बना रहे हैं, उससे संस्थान संचालक हेमंत देवांगन हैरत में हैं।

गढ़ कलेवा से शुरू हुई छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की पहचान अब विस्तार लेती नजर आ रही है। शुरुआत कन्फेक्शनरी आइटम के काउंटर से हो चुकी है, जहां अईरसा, ठेठरी और खुरमी जैसे छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने अपनी जगह पक्की कर ली है। इसमें बहुत जल्द गुझिया की भी मौजूदगी देखी जा सकेगी।

रुझान से मिला प्रोत्साहन

उत्सुकता थी उपभोक्ताओं में अईरसा, ठेठरी और खुरमी के स्वाद को लेकर। रुझान जैसा नजर आया और मांग निकली, उसने इन छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के लिए बाजार की राह खोली। पहली बार छोटी मात्रा में बनाए गए। प्रतिसाद इतना जोरदार रहा कि अब यह तीनों व्यंजन काउंटर में पहुंचते ही बिक जा रहे हैं। इसलिए मांग के अनुरूप बनाया जा रहा है।

बहुत जल्द गुझिया भी

अईरसा, ठेठरी और खुरमी में जैसी उपभोक्ता मांग है, उसे देखते हुए बहुत जल्द गुझिया की पहुंच काउंटर तक तय करने की योजना है। आहिस्ता-आहिस्ता अन्य छत्तीसगढ़ी व्यंजन की उपलब्धता की सोची जा रही है। दिलचस्पी यह कि सभी वर्ग के उपभोक्ताओं के बीच, उपलब्ध तीनों छत्तीसगढ़ी व्यंजन पसंद किये जा रहे हैं।

सबसे आगे अईरसा

देवांगन खजूरवाला नाम से संचालित इस संस्थान में अईरसा  240 रुपए किलो, ठेठरी 300 रुपए किलो और खुरमी मात्र 200 रुपए किलो की दर पर विक्रय किया जा रहा हैं। उपभोक्ताओं की सुविधा के अनुसार छोटे पैक में यह तीनों खाद्य सामग्री संस्थान ने उपलब्ध करवाई है। यानी हर क्रय शक्ति के भीतर यह खरीदे जा सकते हैं।