रिकॉर्ड ऊंचाई पर भाजी फसलें
भाटापारा। मेथी भाजी 200 रुपए किलो। पखवाड़े पर पहले शुरू हुई आवक ने जोर नहीं पकड़ा है लेकिन तेवर बता रहे हैं कि भाजी के शौकीनों को मेथी ही नहीं लाल, पालक और खेड़हा सहित अन्य भाजी की खरीदी के लिए अच्छी- खासी कीमत चुकानी होगी।
हरी सब्जियों की कीमत में अब भी राहत देने वाली मंदी नहीं आई है। इस बीच शीत ऋतु के दिनों में आने वाली भाजी फसलों की आवक शुरू हो चुकी है। कीमत तेज इसलिए भी है क्योंकि सप्लाई लाइन बेहद कमजोर है। यह स्थिति आगे भी बने रहने की आशंका है क्योंकि अच्छी कीमत की लालसा में परिपक्वता अवधि के पहले ही निकाला जाने लगा है।

तेवर मेथी और लाल भाजी के
लाल भाजी की आवक को दूसरा महीना चालू हो चुका है जबकि मेथी भाजी की आवक पखवाड़े पर पहले ही सामान्य हो पाई है । मांग और खरीदी बढ़िया है लेकिन कीमत बाधा बनी हुई है। लाल भाजी में प्रति किलो कीमत 160 से 180 रुपए बोली जा रही है, तो मेथी भाजी 200 रुपए किलो की उच्चतम कीमत के साथ शीर्ष पर है। सप्लाई लाइन शार्ट होने की स्थिति में आ चुकी यह दोनों भाजी, फिलहाल तेज ही रहेंगी।

एक समान पालक और अमारी
आहिस्ता-आहिस्ता पालक भाजी में आपूर्ति बढ़ते क्रम पर है। ऐसे में भाव हल्की मंदी का संकेत दे रहे हैं। 120 रुपए किलो की कीमत के साथ पालक भाजी आउटर एरिया में 150 रुपए किलो तक बताए जा रहे हैं। कीमत के मामले में अमारी भाजी भी पालक जैसी दर यानी 120 रुपए किलो पर ठहरी हुई है। तेजी के संकेत इसलिए नहीं है क्योंकि इसमें शहरी उपभोक्ता खरीद कमजोर है।

सेहत सुधर रही खेड़हा और चेंच की
सुबह ही खरीदी में रहती है चेंच और खेड़हा भाजी। भाजियों की उपलब्ध सभी प्रजातियों की तुलना में यह दोनों, कीमत के मामले में राहत दे रहीं हैं और यही वजह दोनों की मांग बढ़ाने में मदद कर रही है। शहरी और ग्रामीण उपभोक्ता वर्ग की पसंद में आने वाली खेड़हा भाजी 20 रुपए गड्ड़ी और चेंच भाजी 100 रुपए किलो जैसी कीमत के साथ न केवल मांग में बनी हुई है बल्कि भाजी बाजार में अपनी हिस्सेदारी भी बढ़ा रही है
