800 रुपए की छलांग लगाकर पहुंचा 2200 से 2300 रुपए क्विंटल
बिलासपुर। पहले था 1400 से 1500 रुपए। अब है 2200 से 2300 रुपए। नीम सीड में 800 रुपए की यह तेजी वनोपज कारोबारीयों को ना केवल हैरान कर रही है बल्कि शॉर्टेज जैसी स्थिति बन चुकी है। मांग निरंतर बनी हुई है।
परंपरागत मांग क्षेत्र दक्षिण भारत इस बार छत्तीसगढ़ से दोगुनी मात्रा में नीम सीड की खरीदी कर रहा है। ऐसे में संग्रहित उपज की मात्रा लगातार घट रही है जबकि आवक क्षेत्र लगभग शून्य की खबर भेज रहा है। इसलिए भाव पहली बार रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंचा हुआ है।

इसलिए दोगुनी खरीदी
नीम आधारित कीटनाशक व नीम कोटेड उर्वरक बनाने वाली कंपनियां। नीम गुठली की खरीदी करने वाले परंपरागत खरीदी क्षेत्र रहे हैं। इसके अलावा नीम तेल और साबुन उद्योग भी बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। खरीदारों में देश में दक्षिण भारत एकमात्र ऐसा प्रांत है, जो छत्तीसगढ़ की इस वनोपज की लगभग पूरी मात्रा खरीदता है। प्रतिस्पर्धा इस बार इसलिए बढ़ी हुई है क्योंकि देश स्तर पर पौधरोपण की गतिविधियां जारी है। नीम के पौधे इसमें शीर्ष पर हैं।

खत्म हो रहा भंडारण
परंपरागत खरीददारों के अलावा पौधरोपण की योजना में नीम को जो जगह मिल रही है, उसने मांग में दोतरफा वृद्धि कर दी है। यह पहली बार है जब जुलाई के महीने में ही भंडार गृह खाली होने की स्थिति में आ चुके हैं। बढ़ती मांग और बेहतर कीमत को देखते हुए वनोपज कारोबारीयों ने उड़ीसा से नीम गुठली की खरीदी चालू कर दी है। लगभग शॉर्टेज की स्थिति में आ चुका नीम गुठली अब 2200 से 2300 रुपए क्विंटल पर पहुंच चुका है। पूर्व में यह 1400 से 1500 रुपए क्विंटल पर स्थिर था।

ऐसा है देश में उत्पादन
देश में उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उड़ीसा में नीम के वृक्ष बहुतायत में मिलते हैं। गुणों के खुलासे के बाद अब संपूर्ण देश में इसकी संख्या बढ़ रही है क्योंकि पौधरोपण में यह पहले क्रम पर है। वानिकी वैज्ञानिकों के अनुसार देश में लगभग दो करोड़ के आसपास नीम के पेड़ हैं। जिनकी बीज उत्पादन क्षमता लगभग लगभग 540.000 टन के आसपास है लेकिन दोहन की मात्रा 20 से 25 फ़ीसदी ही है। शेष मात्रा का उपयोग नहीं हो पा रहा है क्योंकि संग्रहण भंडारण और विपणन की जानकारी अभी तक नहीं है।

उड़ीसा से मंगवा रहे
दक्षिण भारत और कीटनाशक के साथ उर्वरक निर्माण करने वाली इकाइयां इस बार लगभग दोगुनी मात्रा में नीम गुठली की खरीदी कर रही हैं। भंडारण लगभग खत्म होने की स्थिति में है इसलिए उड़ीसा से खरीदी की जा रही है।
सुभाष अग्रवाल, एसपी इंडस्ट्रीज, रायपुर

बीजों का अवैज्ञानिक दोहन प्रमुख कारण
नीम की व्यवसायिक सफलता के लिए समय पर अच्छी गुणवत्ता वाले नीम के बीजों की पर्याप्त आपूर्ति महत्वपूर्ण है। बीजों के अवैज्ञानिक दोहन से वे समय से पूर्व सड़कर नष्ट हो जाते हैं जिससे मांग एवं आपूर्ति में अंतर होने के कारण मूल्य संकट उत्पन्न हो रहा है।
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर
