जानिए कैसे बनती है बादलों के बीच बिजली

बिलासपुर। कसडोल के पास आकाशीय बिजली गिरने से 25 बकरियों और महिला चरवाहे की मौत। हथबंद के करीब एक अन्य घटना में एक महिला गंभीर रूप से घायल। बीते सप्ताह की ही हैं, यह दोनों घटनाएं। तेज गड़गड़ाहट के साथ तेज आवाज और तेज चमक। आखिर बादलों के बीच बिजली कैसे बनती है ? आइए, जानें कैसे यह सब होता है ?

बारिश का मौसम। खूब आ रहे हैं घने बादल। खूब गरज रहे हैं। तेज गड़गड़ाहट के साथ आकाशीय बिजली भयभीत भी कर रही है। साथ ही बढ़ रही है आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं और चपेट में आते मानव और मवेशी। जानमाल को हानि पहुंचाने वाली यह प्राकृतिक आपदा आखिर किस तरह धरती पर पहुंचती है ? इसकी जानकारी मौसम वैज्ञानिकों ने न केवल साझा की है बल्कि सुरक्षित रहने के उपाय भी सुझाए हैं।


पहले चमक फिर गरज

बादलों के बीच पानी के छोटे-छोटे कण होते हैं, जो वायु के संपर्क में आने पर आवेशित हो जाते हैं। यह प्रक्रिया बादलों पर पॉजिटिव और नेगेटिव चार्ज की वजह बनती है। यह दोनों चार्ज वाले बादल जब एक दूसरे से टकराते हैं, तब लाखों वोल्ट की बिजली बनती है। चमक के रूप में नजर आने वाली यह बिजली, तेज गर्मी उत्पन्न करती है। इससे वायु का फैलाव होता है। इससे पहले से मौजूद कण आपस में टकराते हैं। प्रतिक्रिया स्वरुप यह टकराव गरज के रूप में सुनाई देता है।


ऐसा इसलिए

बिजली की चमक और गड़गड़ाहट लगभग एक साथ होती है लेकिन बिजली की चमक पहले नजर आती है और आवाज बाद में। इसकी बड़ी वजह यह है कि प्रकाश की गति लगभग 300,000 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है, तो वहीं ध्वनि की गति प्रकाश की गति से लगभग आधी। यही वजह है कि बिजली की चमक पहले नजर आती है और ध्वनि बाद में सुनाई देती है। दोनों स्थितियां जानमाल को बेहद नुकसान पहुंचाने वाली मानी जाती है।


यहां खतरा सर्वाधिक

आकाशीय बिजली गिरने का सर्वाधिक खतरा इमारत, खेतों में काम करने वाले, पेड़ों और तालाब में नहाते हुए लोगों पर होता है। यह इसलिए क्योंकि चार्ज बादल जब धरती के ऊंचे पेड़ या इमारत के करीब से गुजरते हैं, तब उससे चार्ज के विरुद्ध विपरीत चार्ज उत्पन्न होता है। इसकी मात्रा काफी ज्यादा होने की स्थिति में बिजली के रूप में प्रभावित इमारत या पेड़ पर प्रवाहित होती है। इसे आकाशीय बिजली गिरना कहा जाता है। जो जानलेवा साबित होती है।


बरतें यह सावधानी

यदि खुले क्षेत्र में हैं तो पेड़ों के नीचे शरण नहीं लें। आकाशीय बिजली गिरने की स्थिति में धातु की वस्तुएं जैसे बाइक, छतरियां और मोबाइल फोन जैसे उपकरण के संपर्क से भी बचें। भवन के अंदर होने की स्थिति में बिजली के उपकरण से संपर्क ना करें। दरवाजे खिड़कियां बंद रखें।


बादलों के बीच बनती है आकाशीय बिजली

बादलों के बीच मौजूद पानी के कण वायु के संपर्क में आते ही नेगेटिव और पॉजिटिव चार्ज की स्थिति बनाते हैं। यह दोनों जब आपस में टकराते हैं, तब लाखों वोल्ट की बिजली उत्पन्न होती है। इसकी मात्रा अधिक होने पर यह बिजली धरती तक पहुंच जाती है। इसे ही आकाशीय बिजली कहा जाता है।
– डॉ एस आर पटेल, रिटायर्ड साइंटिस्ट, एग्रोनॉमी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर