बिलासपुर। कचनार के फूल और छाल से बनाई जा रही है, मधुमेह और डायरिया नियंत्रण करने वाली दवाईयां। भरपूर मेडिशनल प्रॉपर्टीज के खुलासे के बाद ,अब इसकी मदद से सर्पदंश के बाद बचाव की दवाइयां भी बनाई जा रही हैं।
कचनार, जिसे साल में केवल एक दिन याद किया जाता है। वह है, विजयादशमी का पर्व। इसकी पत्तियों को सोनपत्ती के रूप में एक दूसरे को भेंट किया जाता है। अब यह पहचान ऐसे क्षेत्र में फैलने जा रही है, जिसका महत्व सीधे-सीधे जीवन से जुड़ा हुआ है। इसके फूल और छाल में भी महत्वपूर्ण गुणों के खुलासे के बाद औषधि निर्माण इकाइयां खरीदी करने लगीं हैं।

यह औषधीय तत्व
कचनार के फूलों की 3 प्रजातियों में से लाल और सफेद फूल में भरपूर औषधीय तत्वों की जानकारी मिली है। एंटी डायबिटीज, एंटी मलेरियल, एंटी बैक्टीरियल, एंटी कैंसर, एंटी फंगल ,लेसेक्टिव, लिवर टॉनिक और एंटीअल्सर जैसे तत्वों को कचनार के फूलों और छाल की प्रभावशीलता को बढ़ाने में सहायक माना गया है।

इनके लिए प्रभावी
फूलों से बनाई जा रही औषधियों से मधुमेह, खांसी ,कफ ,घाव, त्वचा रोग जैसी बीमारियां तो दूर की जा सकेगीं। इसके अलावा अल्सर और कैंसर जैसी घातक बीमारियों को नियंत्रण में रखा जा सकेगा। साथ ही इससे भूख बढ़ाने वाली औषधियां भी बनाई जा रही है।

जानिए कचनार को
फेबेसी परिवार के सदस्य, कचनार के पेड़ों में तीन रंग के फूल खिलते हैं। सफेद, लाल और पीला। इनमें यही फूल, इस समय औषधि निर्माता इकाइयों की मांग में बने हुए हैं क्योंकि तीनों प्रजातियों के गुण और फायदे बराबर हैं।इसका वैज्ञानिक नाम बौहिनिया वैरीगैटा है। आम बोलचाल की भाषा में इसे सोन पत्ती का पेड़ के नाम से जाना जाता है।

औषधीय गुणों से भरपूर कचनार
कचनार आयुर्वेद में अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय वृक्ष है। इसके फूल, कलियाँ और छाल में मधुमेह, डायरिया, त्वचा रोग, अल्सर तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने की क्षमता पाई गई है। हाल के अध्ययनों से इसके औषधीय उपयोग की संभावनाएँ और अधिक मजबूत हुई हैं।
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर
