श्री शिव महापुराण, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड भी खूब
बिलासपुर। हैरत में डाल रहे हैं ग्रंथ। श्री रामचरितमानस और श्री शिव महापुराण ऐसे ग्रंथ हैं जिनके लिए अतिरिक्त आर्डर दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद मांगी जा रही संख्या में यह ग्रंथ उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में अब अन्य प्रकाशकों से संपर्क साधा जा रहा है।
श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद गीता प्रेस गोरखपुर के पास देश स्तर पर श्री रामचरितमानस के लिए मांग पहुंच रही है। हैरत इसलिए जताई जा रही है क्योंकि मांग प्रवाह अभी बना हुआ है। कम होने के आसार नहीं हैं। इसलिए अब संस्थानें अन्य प्रकाशक कंपनियों के पास ऑर्डर दे रहीं हैं ताकि समय रहते मांगी जा रही ग्रंथों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

निरंतर मांग गीता प्रेस से
गीता प्रेस गोरखपुर। ग्रंथ और धार्मिक किताबों के लिए विशेष पहचान रखने वाली यह संस्था पहली बार मांग के दबाव के बीच संचालन में है। चौतरफा मांग को देखते हुए आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जा रही है लेकिन विलंब होता देख, अब संस्थानें अन्य प्रकाशनों से संपर्क साध रही है ताकि शॉर्टेज जैसी स्थिति नहीं बनने पाए। कोशिश सफल हो रहीं हैं लेकिन मांग में प्राथमिकता अभी भी गीता प्रेस को ही दी जा रही है।

बढ़ने लगी कीमत
ग्रंथों की छपाई के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कागज की जरूरत होती है लेकिन कागज कारखानों के पास कच्ची सामग्री की उपलब्धता कमजोर है। ऐसे में गुणवत्ता वाले कागज की कीमत बढ़ी हुई है। इसका असर ग्रंथों की कीमत पर पड़ चुका है। लगभग सभी ग्रंथों की कीमत 60 से 100 रुपए बढ़ी हुई है। इसके बाद भी मांग की गति एक समान बनी हुई है। बढ़त के संकेत इसलिए भी मिल रहे हैं क्योंकि धार्मिक आयोजन खूब हो रहे हैं।

शिखर पर श्री रामचरितमानस
श्री रामचरितमानस वैसे भी शीर्ष पर था। अब भी है। कागज के दाम बढ़ने के बाद अब यह 340 रुपए की जगह 400 रुपए पर पहुंच गया है। दूसरे नंबर पर शिव महापुराण है, जिसके लिए 400 रुपये देने होंगे। फिलहाल शॉर्टेज के बीच ही माना जा रहा है इस ग्रंथ को। श्री हनुमान चालीसा 5,10 और 20 रुपए पर पहुंच गया है, तो सुंदरकांड के लिए 10 से 15 रुपए देने होंगे। बढ़ी कीमत के बावजूद खरीदे जा रहे हैं यह ग्रंथ।
श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा के बाद ग्रंथों की मांग में लगभग दोगुनी वृद्धि देखी जा रही है। गीता प्रेस गोरखपुर से शॉर्ट सप्लाई को देखते हुए अन्य प्रकाशनों से संपर्क साधा जा रहा है।
- हिमांशु मिश्रा, श्री महावीर पुस्तकालय, बिलासपुर
