संकट में रबी की फसल
बिलासपुर। सामान्य से ज्यादा ही है न्यूनतम और अधिकतम तापमान। सूर्य चमक के बढ़ते घंटे, आद्रता के प्रतिशत पर भी असर डालने लगे हैं। ऐसे में फरवरी माह का चल रहा सप्ताह संकेत दे रहा हैं कि इस बरस तापमान का नया आंकड़ा दर्ज हो सकता है।
दोपहर अब गर्म होने लगी है। यह देर शाम तक महसूस किया जाने लगा है। दर्ज हो रहे आंकड़े, सामान्य जन-जीवन पर भले ही फिलहाल असर नहीं डाल रहे हों लेकिन बड़ी चिंता उन किसानों में देखी जाने लगी है जिनके सिंचाई के साधन, धीमी गति से साथ छोड़ने लगे हैं। ऐसे में तैयार हो रही फसल बचाने की जुगत की जाने लगी है।

सूर्य चमक रहा 7 घंटे
तापमान के स्तर पर नजर रख रहे मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय न्यूनतम तापमान 19.04 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 33 .0 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच चुका है। जबकि आद्रता का स्तर 83% पर पहुंचना दर्ज किया जा रहा है। वायु वेग 0.23 किलोमीटर प्रति घंटा पर है। चिंता, सूर्य चमक की बढ़ती अवधि को लेकर है, जो 7 घंटे से आगे बढ़ती नजर आ रही है।

चिंता में किसान
मौसम और तापमान का असर अब रबी फसल ले रहे किसानों पर भी देखा जा रहा है। यह इसलिए क्योंकि भूजल स्तर धीरे-धीरे नीचे उतरता जा रहा है। कमजोर होती धार, फसल की प्यास नहीं बुझा पा रही है। जबकि गेहूं, सरसों और अन्य दलहन-तिलहन फसलों को अंतिम सिंचाई की जरूरत है। लिहाजा जैसे-तैसे करके नमी बनाए रखने के प्रयास किसान कर रहे हैं।

करें यह उपाय
बढ़ता तापमान और भूजल का गिरता स्तर देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि अंतिम सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर का उपयोग करें। इससे दूर तक सिंचाई संभव होती है। इसके साथ मिट्टी में नमी की मानक मात्रा भी बनी रहेगी और भूजल का स्तर भी बनाया रखा जा सकेगा। यह प्रयास, फसल की परिपक्वता तक करना होगा।
किसानों की चिंता स्वाभाविक
तापमान का स्तर जैसा देखा जा रहा है, उससे रबी फसल ले रहे किसानों में चिंता स्वाभाविक है। कुछ जरूरी उपाय पर गंभीरता के साथ काम किए जाने की जरूरत है। जिससे नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
- डॉ एस आर पटेल, रिटायर्ड साइंटिस्ट, एग्रोनॉमी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर
