इस साल भारत सरकार का समर्थन मूल्य है 2183 रुपए,


बीते साल की कीमत पर मामूली 143 रुपए की ही बढ़ोतरी

बिलासपुर। उधर केंद्र में मोदी सरकार ने धान के समर्थन मूल्य में इस चुनावी साल में भी मामूली 143 रुपए की बढ़त कर 2183 रुपए घोषित की है। इधर छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी खुली कृषि उपज मंडी भाटापारा में किसानों ने ग्रीष्मकालीन धान की कीमत में सौ फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी कर 24 सौ रुपए से ऊपर लाकर टिका दिया है। मन माफिया कीमत पर प्रदेश के किसान खुली मंडी में अपनी उपज बेच मोदी सरकार के इस साल के लिए घोषित समर्थन मूल्य को चुनौती दे रहे हैं।

भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विपणन सत्र 2023-24 के लिए खरीफ फसलों के लिए एमएसपी में वृद्धि को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य को 143 रुपये बढ़ाकर 2,183 रुपये प्रति क्विंटल करने की मंजूरी दी है। बीते साल समर्थन मूल्य में धान की खरीदी 2040 रुपए में की गई थी। इस तरह धान की कीमत में मामूली बढ़ोतरी की है। सरकार ने मूंग दाल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सबसे अधिक 10.4%, मूंगफली पर 9%, धान पर 7%, जवार, बाजरा, रागी, मेज, अरहर दाल, उड़द दाल, सोयाबीन, सूरजमुखी बीज पर वित्त वर्ष 2023-2024 के लिए करीब 6-7% की वृद्धि की गई है। भारत सरकार ने धान का एमएसपी 143 रुपये बढ़ाकर वर्ष 2023-24 के लिए 2183 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। बीते 8 साल में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में केंद्र की मोदी सरकार ने महज 713 रुपये की वृद्धि की है। वर्ष 2016-17 में धान का समर्थन मूल्य 1470 रुपये तय किया गया था।

मामूली कीमत पर होती थी खरीदी

अनाज के लिए प्रख्यात छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी खुली कृषि उपज मंडी भाटापारा में महामाया धान की बोली 24 सौ रुपए से शुरू हो रही है। रबी की ग्रीष्मकालीन धान की फसल में ये ऐतिहासिक सौ फीसद की बढ़त पहली बार दर्ज किया गया है, जो केंद्र की मोदी सरकार द्वारा हाल ही में घोषित किए गए धान के समर्थन मूल्य को चुनौती दे रहा है। अब तक ग्रीष्मकालीन धान की फसल की खरीदी मामूली कीमत पर ही होती थी जो 14 सौ रुपए को भी पार नहीं कर पाती थी। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता था। इस साल किसान अपनी उपज मन माफिक कीमत पर अपनी शर्तों पर बेच पा रहे हैं।

अब सरकारी अमले को नहीं होना पड़ेगा हलाकान

खुले बाजार में ग्रीष्मकालीन धान की रबी फसल की ऐसी कीमत का होना छत्तीसगढ़ सरकार के लिए भी राहत भरा है। इस साल की धान खरीदी में सेवा सहकारी समितियों को नए धान के रूप में पुराने धान की आवक को रोकने हलाकान होना नहीं पड़ेगा। सेवा सहकारी समितियों में धान की खरीदी शुरू होते ही अड़तिये सक्रिय हो जाते थे। सेवा सहकारी समितियों में ग्रीष्मकालीन धान की खरीदी रोकने के लिए प्रशासन को हलाकान होना पड़ता था। धान की ऐसी तेजी से अड़तिये और व्यापारियों के पास का स्टाक ही नहीं रहेगा तो फिर ये समस्या भी नहीं रहेगी।