तेजी की संभावना हुई कम
बिलासपुर। संभावना जरा कम ही है, शक्कर की कीमत बढ़ने की। यह इसलिए क्योंकि एथेनॉल का उत्पादन शक्कर कारखानों को पहली बार बेहतर लाभ पहुंचा रहा है। यही वजह है कि शक्कर शांत है।
सीजन लस्सी, शरबत और जूस का। कोल्ड ड्रिंक्स कारखाने भी शक्कर का भरपूर उठाव कर रहे हैं। पहली बार इस क्षेत्र की मांग फरवरी अंत से शुरू होती देखी गई। आशंका थी कीमत के बढ़ने की, यह इसलिए क्योंकि चौतरफा मांग के दिन चालू हो चुके हैं लेकिन यह आशंका निर्मूल निकली। फिलहाल कीमत स्थिर है और मांग क्षेत्र में बढ़त की भरपूर संभावना है।

सर्वाधिक मांग यहां
कोल्ड ड्रिंक्स। मौसम है, मांग भी है। इसलिए यह क्षेत्र राज्य स्तर पर आपूर्ति बढ़ा रहा है। इसके पहले शक्कर की दैनिक मांग को पूरा करने के लिए शक्कर की खरीदी यूनिटों ने बढ़ा दी है। लोकल ड्रिंक्स उत्पादन करने वाली इकाइयों की खरीदी बढ़ने से इसमें 25 से 30 फ़ीसदी खपत बढ़ने की खबर है।
पीछे यह भी नहीं
आइसक्रीम, आइस कैंडी और कुल्फी। दूसरा ऐसा बाजार, जिसे इस मौसम में शक्कर का दूसरा बड़ा उपभोक्ता क्षेत्र माना जाता है। मांग यहां से भी निकल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यह इकाइयां शक्कर की मांग को गति दी हुई है। बढ़त और खपत जून अंत तक बने रहेंगे।

यह तीसरे नंबर पर
गन्ना जूस, शिकंजी और लस्सी। हर उपभोक्ता वर्ग को पसंद आने वाले यह पेय जिस गति से हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं, उससे कोल्ड ड्रिंक्स बाजार को बड़ा फर्क पड़ने की संभावना है। आसान क्रय शक्ति के भीतर मिलने वाली यह पेय सामग्री शक्कर की मांग वाला तीसरा बड़ा क्षेत्र है। यहां निरंतर मांग शक्कर की अनिवार्य है।
शांत है शक्कर
पिछले दो माह से 3700 से 3800 रुपए क्विंटल पर स्थिर है। तेजी की संभावना नहीं है क्योंकि एथेनॉल उत्पादन और बिक्री से पहली बार शक्कर कारखानों की सेहत बनी हुई है। आगामी महीनों से चुनाव भी होने जा रहे हैं। इसलिए कीमत पर कड़ी नजर है।
