छह साल पुराने मामले में आया फैसला


बलौदाबाजार। असुरक्षित थी, दही और काजू कतली। जांच और प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद सक्षम न्यायालय ने दो कारोबारियों को न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड से दंडित किया है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन के लिए सफलता ही कहा जाएगा ताजा फैसला, जिसमें दो कारोबारियों को सजा सुनाई गई है। फैसला सबक है उन कारोबारियों के लिए जो सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाली खाद्य सामग्री बनाते और बेचते हैं। ताजा फैसला 2016 और 2017 का है। जिसमें दही और काजू की बर्फी, जांच में सेवन के योग्य नहीं मिली थी।

क्या था मामला

सत्र 2016 और 2017 में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने अपनी नियमित जांच के दौरान जिला मुख्यालय में खाद्य सामग्री बेचने वाली दो संस्थानों में जांच की थी। जिसमें दही और काजू की कतली का सैंपल लिया था। प्रयोगशाला में हुई जांच में यह दोनों सामग्रियां अमानक मिली। इसके बाद यह मामला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में पेश किया गया था।

दो सजा एक साथ

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय ने दोनों मामलों में की गई जांच और परीक्षण रिपोर्ट को सही पाया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद संबंधित दही कारोबारी और मिठाई विक्रेता को कोर्ट उठते तक खड़े रहने और दस-दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। बतातें चलें कि जिले में इसके पहले भाटापारा की एक दाल मिल संचालक को अर्थदंड से दंडित किया जा चुका है।