अलर्ट मोड पर बीआरसीसी
भाटापारा। पानी संकट ने स्कूलों में दस्तक देनी चालू कर दी है। गिरते भूजल स्तर और पहुंच रही जानकारी को देखते हुए स्कूलों से कहा जा रहा है कि प्रस्ताव भेजें ताकि जल्द से जल्द प्राथमिकता के आधार पर पेयजल की पक्की व्यवस्था की जा सके।
साल-दर-साल भूजल स्तर गिरता जा रहा है। इसलिए गहराई बढ़ाई जा रही है। इसके बावजूद स्कूलों में पेयजल संकट खत्म नहीं हो रहा है। गर्मी के दिनों में यह कुछ ज्यादा ही नजर आता है और महसूस किया जाता है। चालू शैक्षणिक सत्र में यह समस्या जनवरी माह से ही देखी जा रही है। कुछ स्कूलों में समय परिवर्तन किया जा चुका है, तो कहीं विचार या प्रस्ताव भेजने की तैयारी है।

संकट इस रूप में
स्विच ऑन करने के बाद विलंब से पानी का निकलना। पतली धार। रुक-रुक कर पानी आना। बाद के समय में झटके से पानी का निकलना और फिर बंद। यह कुछ ऐसे संकेत हैं, जो आने वाले दिनों का हाल अभी से बता रहे हैं। गहराई तो सही है लेकिन पाताल तक पहुंच चुका है पानी।कैसे जलेगा चूल्हा
कैसे जलेगा चूल्हा
पहला असर उस किचन तक दिखाई दे रहा है, जहां मध्यान्ह भोजन बनाया जाता है। जरुरत से कम पानी की उपलब्धता के बीच जैसे-तैसे करके भोजन तो बनाया जा रहा है लेकिन बाद के सारे काम के लिए पड़ोस से मदद मांगी जा रही है।मांगा जा रहा प्रस्ताव

मांगा जा रहा प्रस्ताव
खंड शिक्षा स्त्रोत समन्वयक कार्यालय ने पहुंच रही जानकारियों पर संज्ञान लेते हुए स्कूलों से कहा है कि बोर की संख्या, गहराई और पाइप की मात्रा की जानकारी सहित जरूरत का प्रस्ताव बनाकर भेजें। प्रस्ताव मिलने के निश्चित समय के भीतर व्यवस्था बहाली की जा सकेगी।जानकारी मांगी गई है
जानकारी मांगी गई है
स्कूलों में पेयजल संकट पर नजर है। खंड क्षेत्र की सभी स्कूलों से जानकारी मांगी गई है। संकट की स्थिति से निपटने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजने के आदेश जारी हो गए हैं।
-एल आर साहू, बीआरसीसी, भाटापारा
