मांग में हो रही वृद्धि



भाटापारा। दूध उत्पादन में आंशिक कमी आने के संकेत मिलने लगे हैं क्योंकि हरा चारा की उपलब्धता तेजी से घट रही है। मांग और आपूर्ति के बीच अंतर की खाई बढ़ने ना पाए, इसलिए डेयरियों ने सूखा चारा में खरीदी बढ़ा दी है।

सूरज के चमकने की अवधि बढ़ने लगी है। हरा चारा तेजी से खत्म होने लगा है। पहला असर दूध उत्पादन पर दिखाई देने लगा है, जहां सीजन की मांग ने दस्तक दे दी है। घटते उत्पादन के बीच डेयरिया, मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में लगी हुई हैं। इसमें सफलता भी मिलने लगी है लेकिन चिंता उस गर्मी के दिन की है, जिसने मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश कर लिया है।

आंशिक कमी इसलिए

हरा चारा की उपलब्धता, तेज होती धूप की वजह से कम होने लगी है। इसलिए डेयरियों ने आहार के लिए सूखा चारा बेचने वाली संस्थानों से खरीदी चालू कर दी है। ब्लॉक में लगभग 10000 लीटर दूध का प्रतिदिन उत्पादन होता है। मांग भी इतनी ही होती है लेकिन इसमें अब लगभग 20 फ़ीसदी वृद्धि की खबर आ रही है।

सीजन की निकली मांग

ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखते हुए बाजार ने तैयारी चालू कर दी है, तो शादी-ब्याह की मांग अलग से निकली हुई है। आपूर्ति में निरंतरता बनी रहे, इसके लिए शीतल पेय बनाने वाली छोटी इकाइयों के ऑर्डर भी डेयरियों तक पहुंचने लगे हैं। एक साथ चौतरफा मांग से फिलहाल डेयरियों में बड़ी चिंता देखी जा रही है क्योंकि मांग में दोगुना इजाफा के संकेत है।

दबाव इस क्षेत्र का भी

पैक्ड मिल्क की कीमत जैसी बढ़ी हुई है, उसके बाद इस क्षेत्र का उपभोक्ता का भी ओपन मिल्क काउंटर में दस्तक देने लगा है, जहां कीमत स्थिर है। मालूम हो कि दूध बाजार में पैक्ड मिल्क की हिस्सेदारी लगभग 25 फ़ीसदी बताई जा रही है। इसलिए ओपन मार्केट पर सीजन के साथ, इस नई मांग का भी दबाव बढ़ रहा है।

पर्याप्त हैं मिल्क काउंटर

छोटे-बड़े मिल्क काउंटरों की संख्या शहर में लगभग दो दर्जन बताई जा रही है। मांग के बाद आपूर्ति का जैसा स्तर बना हुआ है, उससे सभी सहमत हैं कि आपूर्ति में आने वाले दिनों में भी कहीं कोई कमी नहीं आएगी।