पेड़ से टक्कर के बाद कार में हुई कथित आगजनी का मामला

सात किमी की दूरी तय करने रतनपुर पुलिस को क्यों लगे सात घंटे

रात्रि गस्त कर रहे जवानों और थाना प्रभारी को क्यों नहीं मिल पायी घटना की सूचना

वसूली के मंत्र ने खत्म कर दी कम्युनिटी पुलिसिंग और सूचना तंत्र

रतनपुर। एन एच 45 पर मध्य रात्रि कथित कार की पेड़ से टक्कर के बाद हुई आगजनी से तीन-चार (एक की शिनाख्त और मौत की पुष्टि नहीं) लोगों के जलकर राख हो जाने के मामले ने कई सवाल पुलिस प्रशासन और कार निर्माता कंपनियों के लिए छोड़े हैं।

तेज़ रफ़्तार कार के पेड़ से टकरा जाने के बाद ऐसा क्या हुआ कि उसमें आग लग गई।आग लगने के बाद कार के किस हिस्से या उपकरण में विस्फोट हुआ जिसकी धमाके दार आवाज सुनकर घटना स्थल के करीब बने मकानों में सो रहे लोगों की नींद टूट गई। वो घर से निकल कर कार से उठ रही तेज लपटों पर तमाशबीन बने रहे। किसी ने जलती कार में सवार लोगों को को बचाने की कोई भी कोशिश नहीं की। सोशल मीडिया में वायरल आग की भीषण लपटें कार से उठ रही है इसमें काफी लोग भी आसपास दिख रहें हैं और कार में लगी आग को बुझाने की कोई भी कवायद होती नहीं दिख रही थी। आसपास के लोगों के मुताबिक धमाके की आवाज साढ़े बारह से डेढ़ बजे के आसपास सुनी गई, और घर से बाहर आकर कार से उठती आग की भीषण लपटों को देखा। घटना स्थल के करीब ही एक दुकान पर सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। संभव है कुछ काम के चल चित्र उसमें से भी निकल आए।

दस मिनट की दूरी पर है रतनपुर थाना

एन एच 45 में केंदा रोड पर ग्राम पोड़ी के पेट्रोल पंप के पास हुई घटना रतनपुर थाने से महज सात किलोमीटर की दूरी पर है। जहाँ तक थाने से पहुंच महज दस मिनट में ही संभव है। रतनपुर पुलिस ने आगजनी की घटना जानकारी 112 से मिलने की बात कह रही है तो डायल 112 को रात के कितने बजे इस घटना की जानकारी मिली उसके कितने मिनट के बाद वो घटना स्थल पर पहुंची।

सोशल मीडिया में वायरल वीडियो

आग बुझाने क्यों नहीं हुई कवायद

पुलिस की थ्योरी पर भरोसा करें तो उन्हें घटना की जानकारी 112 से मिली । ऐसे में 112 में तैनात जवान मौके पर गए होंगे। …तो फिर उन्होंने घटना स्थल पर पहुँचने के बाद कार पर लगी आग को बुझाने के लिए उनके द्वारा कोई भी कवायद क्यों नहीं गई। रेस्क्यू क्यों नहीं किया। घटना स्थल पर कार में लगी आग को बुझाने के प्रयास करने के कोई निशाना नहीं है। पेंड्रा मरवाही की ओर जा रहे एक राहगीर ने जली कार फोटो सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर उतारी। उस समय पुलिस का एक भी सिपाही मौके पर मौजूद नहीं था। उस समय भी राहगीर कार के अंदर के वीभत्स नजारे बड़ी आसानी से देख रहे थे।

मुख्यालय में नहीं थे थाना प्रभारी !

थाना प्रभारी भी लोगों के आक्रोश बढने पर सुबह 10 बजे के करीब पहुंचे। ऐसे में सवाल स्वाभाविक है कि थाना प्रभारी मुख्यालय पर नहीं थे ? या अपने थाने से इतनी दूरी पर थे कि घटना स्थल तक पहुंचने उन्हें भी पहुंचने सात-आठ घंटे का समय लग गया। थाने और जिला मुख्यालय से इतने घंटे की दूरी पर थे तो उनकी रवानगी भी रजिस्टर में दर्ज होगा। पुलिस अधीक्षक को भी इसकी जानकारी रही होगी। …तो फिर उनकी जगह क्यों कोई जिम्मेदार अफसर घटना की सूचना के साथ रेस्क्यू करने क्यों नहीं पहुंचा।

कार में ऐसा क्या था जिससे हड्डी भी जलकर हुई राख
जानकारों के मुताबिक किसी भी मानव शरीर को जलाकर राख कर देने के लिए 6 सौ से 12 सौ डिग्री सेल्सियस तापमान की जरुरत लगातार घंटे भर के लिए होता है। ऐसे में कार में कथित तीन चार लोगों के अलावा ऐसा क्या था जिसके जलने से लगातार घंटे भर तक 7 सौ से 12 सौ डिग्री सेल्सियस तापमान बना रहा। जिसकी वजह से कार के अंदर सवार लोगों की हड्डियां भी राख में तब्दील हो गए। एल्यूमीनियम के बने उपकरण भी पिघल कर बहने लगे।

मामूली चीज़ नहीं है हड्डी

जानकारों के मुताबिक आदमी की हड्डी मामूली चीज नहीं है। इसमें डेढ़ हज़ार डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी झेल सकने की क्षमता होती है। आंतरिक्ष में जाने वाले यानों को सूरज की गर्मी से बचाने के लिए सुरक्षा कवच में भी हड्डियों का ही उपयोग किया जाता है।अंतिम संस्कार के दौरान भी चिते की आग में शव की हड्डियां पूरी तरह राख नहीं होती है ।

छत पर भी खुलती एक खिड़की
हुंडई कंपनी की वेन्यू माडल जिस कार में आगजनी की घटना हुई है उसके छत पर भी एक खिड़की खुलती है। वहीं कार सवार लोगों में खुद के जीवन को बचाने के निशानात भी नहीं दिखे। जिसे लेकर भी लोगों के मन में कई सवालात है जिसे तलाशने की जरूरत है। घटना को लेकर सवाल इसलिए भी है कि मृतकों में से एक मीडिया कर्मी था जिसका रसूख सिपाही से अधिकारी तक था। … तो क्या होना था किसी का राज फास…

कहां गई विक्टोरिया

कार में एक और युवती विक्टोरिया के सवार होने की बात की जा रही है। घटना के बाद से विक्टोरिया का मोबाइल भी स्वीच ऑफ बता रहा है। जली गाड़ी के अवशेष में एक चाबी मिली है जो विक्टोरिया के बिलासपुर स्थित मकान की बताई जा रही है रतनपुर थाने में उसके परिजन भी देर शाम पहुंचे । एनटीपीसी कोरबा में कार्यरत विक्टोरिया के पिता सी एल आदित्य ने बताया उनकी बेटी बिलासपुर के गया विहार कॉलोनी में रहती थी। लड़की के पिता का दावा है कि उनकी बेटी भी कार में मौजूद थी। कार में मिले शरीर के अवशेष किनके है इसका खुलासा डीएनए टेस्ट से होगा। वहीं कार में कितनी डिग्री सेल्सियस से शव जले और क्या कार में वो कौन सी चीजें मौजूद थी जिससे इतना तापमान बढ़ा कि हड्डियां तक जल कर राख हो गई। इसका खुलासा फोरेंसिक एक्सपर्ट जांच के बाद करेंगे।