संकट में ‘सायकल…’
इंतजार पैसेंजर गाड़ियों के सामान्य परिचालन का
भाटापारा। स्टैंड की रौनक रही सायकल अब स्टैंड में नजर नहीं आती। जो आ रहीं हैं उन्हें स्टैंड कारोबार के क्षेत्र के लिए उत्साह बढ़ाने वाला नहीं माना जा रहा है। रही-सही कसर यात्री टिकट की बढ़ी हुई दर पूरी कर रही है।

रेलवे स्टेशन का सायकल स्टैंड। दो पहिया,तिपहिया और चार पहिया वाहन रखने वाला प्रमुख कारोबारी क्षेत्र संकट के साए में है। यह इसलिए क्योंकि नाम और पहचान देने वाली सायकल यहां नजर नहीं आ रही है। लाइफलाइन मानी जाने वाली साइकिल के नहीं आने से जो स्थितियां बनी हुई हैं, उसे देखते हुए यात्री ट्रेनों के सामान्य परिचालन का इंतजार कर रहा यह क्षेत्र।
बड़ी वजह यह
600 से 700 दोपहिया की क्षमता वाले साइकिल स्टैंड में साइकिल की हिस्सेदारी महामारी के पूर्व में 30 से 40 प्रतिशत तक की होती थी। अब स्थिति में बड़ा परिवर्तन यह आ चुका है कि साइकिल की हिस्सेदारी लगभग शून्य पर आ चुकी है। यह इसलिए क्योंकि साइकिल मालिकों की या तो नौकरी जा चुकी है, या फिर रोजगार के अवसर पहले जैसे नहीं रहे।

यात्री किराया दोगुना
लंबी अवधि तक बंद रहने के बाद जब यात्री ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया, तब दोगुना किराया देकर यात्रा करने की जैसी शर्तें लागू हुई। यह अभी भी प्रभावी है। यह शर्त कमजोर आय वर्ग और दैनिक मजदूरी करके जीवन-यापन करने वाले यात्री वर्ग पर बड़ी मार है। इसलिए साइकिल रखने वाले ऐसे यात्री, अब स्टैंड से दूर हैं।
सामान्य नहीं परिचालन
यात्री ट्रेनों का सामान्य परिचालन नहीं हो पाना, तीसरी ऐसी बड़ी वजह मानी जा रही है जिसने स्टैंड की रौनक छीन रखी है। तेज गति से चलने वाली नई यात्री ट्रेनें और माल परिवहन ट्रेनों को परिचालन में प्राथमिकता मिलने से नियत स्टेशन पहुंचने में, चल रही ट्रेनों को दोगुना समय लग रहा है। इसलिए कमजोर आय वर्ग के यात्रियों ने रेल यात्रा से किनारा किया हुआ है। इसका सीधा असर सायकल स्टैंड पर पड़ रहा है।
