पूरे साल मिलेगी मौसमी की साग-भाजी…
गौठानों को सोलर ड्रायर से लैस करने की घोषणा के बाद खुले संभावनाओं के द्वार
बिलासपुर। सूखी सब्जियों का भी होगा अपना बाजार। आने वाले कुछ बरसों में सब्जी बाजार का यह नया स्वरूप मुख्यमंत्री की उस घोषणा के बाद देखा जा सकेगा जिसमें उन्होंने साग- सब्जियां सुखाने के लिए गौठानों को सोलर ड्रायर दिए जाने का वायदा किया है। हांलाकि साग-सब्जियों सूखा कर संरक्षित रखने का प्रचलन नया नहीं है। पुरखे इसे “खोइला” कहते थे। झड़ी लगने पर बारिश के दिनों में घर में ऐसी सब्जी का स्वाद लोग परिवार के साथ लेते थे।
अब हर मौसम में ऑफ सीजन सब्जियों का स्वाद लिया जा सकेगा। यह इसलिए क्योंकि हरी सब्जियों को सुखाकर रखने के लिए गौठानों को सोलर ड्रायर दिया जा रहा है। बदलाव का असर निजी उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र में भी देखा जा सकेगा। यह इसलिए क्योंकि यह क्षेत्र अभी तक इस तकनीक से अनजान है। खासकर टमाटर और बैगन की फसल ले रहे किसान सबसे ज्यादा राहत की सांस ले सकेंगे क्योंकि नुकसान इन्हें ही उठाना पड़ता है।
यह सब्जियां सूखे दिनों में भी
सब्जी वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रक्रिया में भिंडी, ग्वार फली, कुम्हड़ा, बैगन, टमाटर, मिर्च, धनिया पत्ती, मेथी भाजी और मटर को सुखाकर सेवन किया जा सकेगा। सेमी और तिवरा भाजी तो हमेशा से शिखर पर रहता आया है। लिहाजा इन्हें प्राथमिकता के आधार पर रखा जा सकेगा।

छह माह तक सुरक्षित
जिन हरी सब्जियों को सुखाकर रखने के योग्य माना गया है, उनकी उम्र सीमा 6 माह तक मानी गई है। इसके अलावा हरी सब्जियों में नमी की मात्रा 80 प्रतिशत तक होती है। इसलिए सूखने के बाद नमी में यह मात्रा 20 प्रतिशत से थोड़ी कम होनी चाहिए याने नमी की मानक मात्रा पर ध्यान देना जरूरी होगा।
तैयार होगा नया बाजार
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की इस घोषणा का सबसे ज्यादा लाभ सब्जी की फसल लेने वाले किसानों को भी होगा। यह इसलिए क्योंकि सोलर ड्रायर से यह क्षेत्र अनजान था। जानकारी में आने के बाद ऐसे किसान नई तकनीक का लाभ उठाकर सीजन की सब्जियां, ऑफ सीजन में भी बेच सकेंगे। और इसमें भी दो राय नहीं कि सब्जी फसलों का रकबा बढ़ेगा।

सराहनीय योजना
गौठानों को सोलर ड्रायर देने की योजना बेहद सराहनीय है। सीजन में हरी सब्जियां के विक्रय नहीं होने के नुकसान से बचा जा सकेगा। सब्जियों का चयन और नमी के मानक का पालन अनिवार्य होगा।
डॉ अमित दीक्षित,डीन, कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, सांकरा, दुर्ग
