बीज, पत्तियों से बनते हैं कीटनाशक
छाल और लकड़ियां जाती हैं प्लाईवुड व जहाज इंडस्ट्रीज में
बिलासपुर। पेड़ों की खेती करने वालों के लिए खुशखबरी। महोगनी का पौधा लगाएं। पेड़ तैयार होने के बाद इसका हर हिस्सा बेचा जा सकेगा। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अल्प सिंचाई व्यवस्था वाले क्षेत्र में यह आसानी से तैयार हो जाता है।
प्रकृति का अनोखा उपहार है महोगनी। बिगड़ते पर्यावरण को सुधारने के लिए जिन वृक्षों को अहम माना गया है उसमें महोगनी का भी नाम है। इसके अलावा विशाल उपयोग क्षेत्र भी है महोगनी का। यह इसलिए क्योंकि इसका बीज, इसकी छाल और लकड़ियां उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी हैं जो दवाएं, वार्निश-पेंट और जल जहाज का निर्माण करता है।

जानिए महोगनी को
उपयोग क्षेत्र की मांग के लिए 12 से 15 वर्ष की उम्र वाले महोगनी को सही माना गया है। यह हर प्रकार की जलवायु में तैयार हो जाता है लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों के लिए सही नहीं है क्योंकि तेज वायु प्रवाह में यह तैयार नहीं हो पाता। सिंचाई के लिए उचित जल निकास वाले क्षेत्र में यह शीघ्र तैयार हो जाता है।

बीज और पत्तियां
अपने आप में हैरत में डालते हैं इसके बीज और पत्तियों के गुण। यही वजह है कि पत्तियों और बीज की खरीदी, मच्छर मारने वाली दवाएं बनाने वाली कंपनियां करती हैं। बीज से निकलने वाले तेल की खरीदी करने वालों में वार्निश-पेंट और साबुन बनाने वाली यूनिटें भी है। यानी उपयोग क्षेत्र बेहद विशाल है।

छाल और लकड़ियां
परिपक्वता अवधि पूरी कर लेने के बाद महोगनी की छाल का सबसे बड़ा खरीददार प्लाईवुड इंडस्ट्रीज है, जो छाल निकलने की अवस्था तक इंतजार में रहता है। लकड़ियां बेहद मजबूत और टिकाऊ होती हैं। इसलिए इसकी खरीदी नाव और जल जहाज बनाने वाली इकाइयां करती हैं। मांग के दिनों में इसकी न्यूनतम कीमत 1000 से 2000 रुपए क्यूबिक फीट तक पहुंच जाती है।

किसानों का कमाऊ पूत
इस पेड़ की लकडियां बेहद टिकाऊ होती हैं। इसी कारण इसका इस्तेमाल जहाज, फर्नीचर, सजावट की वस्तुएं, मूर्तियां और गहने बनाने में किया जाता है। पत्तियों और जड़ों से मधुमेह, कैंसर, रक्तचाप और अस्थमा जैसी कई बीमारियों का भी इलाज किया जाता है। बीज और फूलों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयों के निर्माण में किया जाता है। बेजोड़ गुणों वाले इस पेड़ को किसानों का कमाऊ पूत कहा जाता है क्योंकि इसके हर एक भाग का इस्तेमाल होता है और यह सभी महंगे दाम में बिकते हैं।
– डॉ अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट, फॉरेस्ट्री, टीसीबी कॉलेज ऑफ एग्री एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर
