उपभोक्ता राज्यों की मांग नहीं
मिल संचालन में आने लगी परेशानी
भाटापारा। गर्म है धान लेकिन ठंडा है पोहा। दीपावली पर जैसी खरीदी उपभोक्ता राज्यों ने की थी, वह घटकर आधी रह गई है, लिहाजा अच्छे दिन का इंतजार कर रहीं हैं पोहा मिलें।
अच्छा तो बिल्कुल नहीं लेकिन संतोषजनक भी नहीं माना जा रहा है पोहा का बाजार। यह इसलिए क्योंकि मांग एकदम से आधी रह गई है। इसलिए खींचतान करके मिलों का संचालन हो रहा है। ऐसे में घरेलू मांग सहारा बनती नजर आती है क्योंकि यही क्षेत्र मिलों के संचालन में निरंतरता बनाए हुए हैं।

प्रतीक्षा यहां की
छत्तीसगढ़ में पोहा उत्पादन के लिए भाटापारा एक बड़ा नाम है। क्वालिटी पोहा के दम पर यहां की यूनिटों ने गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में अपनी मजबूत जगह बनाई हुई है। दीपावली तक इन राज्यों से बेहतर मांग निकली लेकिन बाद के दिनों में घटने लगी। अब यह 50 फ़ीसदी रह गई है। अब एक बार फिर से इन राज्यों की मांग की प्रतीक्षा है।
राहत यहां से
खींचतान करके चल रही पोहा मिलों के लिए घरेलू मांग सहारा बनी हुई है क्योंकि मौसम के तेवर से पोहा की मांग ने आंशिक बढ़त ली हुई है। इसके अलावा सीमावर्ती राज्यों से भी हल्की डिमांड है। लिहाजा मिलों के परिचालन को निरंतरता मिल रही है।

धान चुस्त, पोहा सुस्त
उपभोक्ता राज्यों की कमजोर खरीदी के बीच धान की कीमत जैसी बनी हुई है, उसे बेहद तेज माना जा रहा है। तुलनात्मक रूप से पोहा की कीमत बढ़नी चाहिए थी लेकिन इसने खुद को 2800 से 3300 रुपए क्विंटल पर स्थिर रखा हुआ है। इसे भी संतोषजनक नहीं माना जा रहा है।
मांग की प्रतीक्षा
उपभोक्ता राज्यों की मांग घटकर आधी रह गई है। यही वजह है कि यूनिटें खींचतान करके चलाई जा रही हैं। मांग का इंतजार कर रहे हैं।
– रंजीत दावानी, अध्यक्ष, पोहा मिल एसोसिएशन, भाटापारा
