परिचालन से बाहर हुई 70 फ़ीसदी मिलें
भाटापारा। सस्ता है पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा का धान। क्रय शक्ति के भीतर है नवसारी और उज्जैन में बने पोहा की कीमत। इसलिए उपभोक्ता राज्यों में शहर के पोहा को कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है।
परिचालन से बाहर हो चुकीं हैं 70 फ़ीसदी पोहा मिलें क्योंकि तैयार उत्पादन को अपेक्षित मात्रा में आर्डर नहीं मिल रहे हैं। जो इकाइयां संचालन में हैं वहां उत्पादन की मात्रा और उत्पादन दिवस कम करने जैसे उपाय किए जा रहे हैं क्योंकि कमजोर मांग का सामना यह भी कर रहे हैं।
सस्ता धान, तो सस्ता पोहा
पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा। इन राज्यों में पोहा क्वालिटी के धान की कीमत 1800 से 1850 रुपए क्विंटल पर स्थिर है। इसलिए गुजरात की नवसारी और मध्य प्रदेश की उज्जैन में चल रहीं पोहा मिलों की खरीदी निकली हुई है। धान की इस कीमत की वजह से दोनों शहरों का पोहा क्रमशः 4000 से 4400 और 4100 से 4500 रुपए क्विंटल पर चल रहा है। कीमत कम होने की वजह से ही उपभोक्ता राज्यों में दोनों शहरों ने उत्पादित पोहा को मांग में बनाए रखा है।

गुणवत्ता में आगे, फिर भी…
रबी फसल की प्रतीक्षा कर रहीं पोहा मिलों को इस समय पोहा क्वालिटी के धान की खरीदी 2600 से 2800 रुपए क्विंटल की दर पर करनी पड़ रही है। इकाइयों का मानना है कि रबी फसल की संभावित आवक बढ़ने और धान में कीमत के नीचे आने के बाद ही पोहा की कीमत कम हो पाएगी और उपभोक्ता मांग में वृद्धि हो सकेगी।
ऐसे हैं भाव धान और पोहा में
गुणवत्ता के मामले में छत्तीसगढ़ का पोहा उपभोक्ता राज्यों में अलग ही पहचान रखता है। विशेष तौर पर महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में लेकिन इन राज्यों की मांग गुजरात के नवसारी और मध्य प्रदेश के उज्जैन में उत्पादित पोहा में ज्यादा देखी जा रही है। इससे इन राज्यों में अपना बाजार बनाए रखने में छत्तीसगढ़ को कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है।
