बलौदाबाजार। पैकेजिंग रोक सकतीं हैं पानी पाउच ईकाइयां। वजन कम करने या तीलियों की संख्या घटाने जैसे फैसले कभी भी ले सकते हैं अगरबत्ती बनाने वाले क्योंकि यह दोनों क्षेत्र पैकेजिंग मटेरियल की शाॅर्ट सप्लाई के घेरे में आ चुके हैं।
मौसम गर्मी का। करीब आ चुका है नवरात्रि का पर्व। खूब बिकते हैं पानी पाउच और अगरबत्ती लेकिन पहली बार यह दोनों उत्पादन रोकने जैसे फैसले लेने के लिए विवश हैं क्योंकि पैकेजिंग मटेरियल उत्पादन करने वाली यूनिटों ने अग्रिम और नगद सौदों पर रोक लगा दी है।

आशंका तालाबंदी की
जिले में करीब 25 से 30 पैकेजिंग यूनिटें हैं। रोजाना लगभग 1 लाख पाउच की पैकेजिंग करने वाली यह ईकाइयां कभी भी परिचालन से बाहर जा सकतीं हैं क्योंकि पाउच रोल निर्माण यूनिटों के पास प्लास्टिक के दाने नहीं हैं। ऐसे में भंडारित पाउच रोल की कीमत 3200 रुपए की जगह 5000 रुपए बोली जा रही है लेकिन इस भाव पर भी कंपनियां आर्डर नहीं ले रहीं हैं क्योंकि आगे और तेजी की धारणा बनी हुई है। इसलिए नगद भुगतान पर भी सौदे नहीं किए जा रहे हैं।

खत्म हो रहा स्टॉक
संकट जिस तेजी से फैलाव ले रहा है, उसे देखते हुए अब भंडारित पाउच का उपयोग किए जाने की खबर आ रही है लेकिन मौसम के तेवर के बीच पाउच में निकलती मांग को देखते हुए माना जा रहा है कि एक सप्ताह से ज्यादा साथ नहीं दे पाएगा स्टॉक। ऐसे में बाॅटलों की खरीदी की ओर ध्यान दिया जा रहा है लेकिन इसकी भी आपूर्ति के लिए नए सौदे नहीं ले रहीं हैं बाॅटल बनाने वाली इकाइयां।

विवश हैं अगरबत्ती बनाने वाले
अगरबत्ती के लिए पैकेजिंग पेपर बनाने वाली इकाइयों ने अगरबत्ती कारखानों को सूचित कर दिया है कि पैकेजिंग पेपर के दाम में 30% की वृद्धि संभावित है क्योंकि जरूरी प्लास्टिक रॉ- मटेरियल की कीमत में तेजी आने लगी है। इसलिए अगरबत्ती बनाने वाले वजन कम करने या तीलियों की संख्या घटने जैसे संभावित विकल्प पर विचार कर रहे हैं।
