गुटका और कोयले की कीमत दोगुनी

भाटापारा। बबूल की जलाऊ लकड़ी थी 6 रुपए किलो। है 16 रुपए किलो। जा सकती है 20 रुपए किलो तक। कमर्शियल गैस की कीमत में रिकॉर्ड उछाल के बाद ईंधन के पारंपरिक विकल्पों में तेजी का दौर चल पड़ा है।

मांग के बेतरह दबाव में है लकड़ी और कोयला जैसे पारंपरिक विकल्प। लिहाजा कोयला और जलाऊ लकड़ी में अब शार्टेज की स्थिति बनने लगी है। इसलिए चल रही कीमत और भी आगे जा सकती है।यह आशंका अब भंडारण जैसी मनोवृत्ति बना रही है।

जलाऊ लकड़ी में उबाल

बेकरियां सबसे बड़ी उपभोक्ता रही है जलाऊ लकड़ियों की लेकिन अब इनकी खरीदी तेजी से घट रहीं हैं क्योंकि जलाऊ लकड़ी की प्रति किलो की खरीदी 16 रुपए में करनी पड़ रहीं हैंं। तेजी के पहले इसकी प्रति किलो कीमत थी 6 रुपए। दोगुनी से ज्यादा वृद्धि के बाद अब बेकरियां उत्पादन घटाने लगीं हैं क्योंकि जलाऊ लकड़ी की कीमत क्रय शक्ति से बाहर जा चुकी है। इसके पूर्व यह क्षेत्र कमर्शियल गैस सिलेंडर की खरीदी करता रहा है, जिसकी कीमत में भी रिकॉर्ड उछाल आ चुकी है।

गुटका गर्म

होटल, ढाबे और स्ट्रीट फूड काउंटर मजबूत उपभोक्ता क्षेत्र माने जाते हैं लकड़ी गुटका के। तेजी की चपेट में अब यह भी आ गए हैं क्योंकि 15 रुपए किलो पर शांत, लकड़ी गुटका में नई कीमत 20 रुपए किलो बोली जाने लगी है। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी ड्रायर चलाने के लिए नई कीमत पर लकड़ी गुटका की खरीदी करनी पड़ रही है। चल रही कीमत और आगे जा सकती है क्योंकि सप्लाई शॉर्ट होने की जानकारियां आने लगी है।

खोज विकल्प की

लकड़ी कोयला था 380 रुपए बोरी। अब 380 से 400 रुपए बोरी। पत्थर कोयला में 30 से 35 किलो की बोरी का नया भाव 400 से 420 रुपए बोला जा रहा है। 30 से 40 रुपए की बढ़ोतरी के बाद अब कोयला भट्ठी जलाने वाले होटल, ढाबे और अन्य संस्थानों में ऐसे विकल्प की खोज की जा रही है जो स्थाई और टिकाऊ हों। यह खोज इंडक्शन चूल्हा पर जाकर खत्म होती नजर आ रही है। जिसकी कीमत फिलहाल क्रयशक्ति के भीतर ही है।