75 रुपए किलो पर बिक रहा प्लास्टिक का कबाड़
बिलासपुर। आर्डर लिख लेते हैं लेकिन भाव आपूर्ति के दिन का लगाएंगे। प्लास्टिक के समान बनाने वाली इकाइयों की इस शर्त ने बाजार की कमर तोड़कर रख दी है क्योंकि हर मिनट में बढ़ जा रही है प्लास्टिक के सामानों की कीमत।
पेट्रोलियम प्रोडक्ट, प्लास्टिक के दानों की आपूर्ति पर रोक लगा दी गई है। इसके बाद प्रदेश में प्लास्टिक के समान बनाने वाली इकाइयों का परिचालन संकट में आ चुका है। लगभग 70 फ़ीसदी इकाइयों का परिचालन बंद होने के बाद अब प्लास्टिक के सामान की कीमत आसमान छूने लगी है।

फोन नहीं उठा रहे…
प्लास्टिक के दानों की देश स्तर पर आपूर्ति बंद होने के बाद इकाइयां प्लास्टिक के कबाड़ कारोबारियों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहीं हैं लेकिन अधिकतर के फोन बंद आ रहें हैं। ऐसे में 40 रुपए किलो पर बिक रहा प्लास्टिक का कबाड़ 60 से 75 रुपए किलो पर जा पहुंचा है। हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि रिसाईकल यूनिटों को प्लास्टिक के कबाड़ की खरीदी 80 से 100 रुपए किलो में करनी पड़ रही है।

शर्त ने तोड़ी बाजार की कमर
प्लास्टिक के दानों की आपूर्ति पर रोक और प्लास्टिक के कबाड़ के आसमान छूती कीमत के बाद ईकाइयां सौदे लिख तो रहीं हैं लेकिन शर्त रख रहीं हैं कि आपूर्ति के दिन जो भाव रहेंगे, उस कीमत पर भुगतान करना होगा। यह शर्त इसलिए कमर तोड़ने वाली मानी जा रही है क्योंकि हर पल बढ़ी हुई कीमत सामने आ रही है। कमी की संभावना दूर-दूर तक नहीं है क्योंकि दानों की आपूर्ति पर कड़ी बंदिश है।

डेढ़ से दोगुना महंगा
संकट की स्थितियों का सामना कर रहे बाजार के बाद असर अब खुदरा बाजार पर नजर आने लगा है। दैनिक उपयोग में आने वाली सामग्री डिस्पोजल 8 रुपए की तेजी के बाद 20 रुपए पैकेट पर पहुंच गया है। प्लास्टिक की पन्नी 160 से 240 रुपए किलो पर जा पहुंची है। सीजन है गार्डन पाइप का लेकिन किलो पीछे 40 से 60 रुपए की तेजी के बावजूद शॉर्ट है सप्लाई। दिन हैं ग्रीन नेट के लेकिन 60 फ़ीसदी उछाल आ चुकी है। सर्वाधिक उछाल उस लपेटा पाइप में आई है, जिसमें प्रति बंडल 200 से 250 रुपए की तेजी आ चुकी है। निर्माण कार्य जोरों पर है लेकिन घर बनाने वालों को धमेला की प्रति नग खरीदी पर 50 फ़ीसदी राशि अतिरिक्त देनी पड़ रही है।
