ब्रांडेड कंपनियों से अपेक्षित मांग नहीं
बिलासपुर । तेजी के लंबे दौर के बाद, अब दगड़ी में अपेक्षित मांग का फिर से इंतजार है। हल्की मंदी के घेरे में आ चुकी दगड़ी में फिलहाल स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि मल्टीनेशनल कंपनियों की मांग लगभग पूर्णता की ओर है।
पोहा के बाद अब छत्तीसगढ़ की दगड़ी, मिक्चर बनाने वाली मल्टीनेशनल यूनिटों में धूम मचा रही है। भाटापारा, रायपुर, बिलासपुर, बालोद और राजनांदगांव में दर्जनों की संख्या में चल रही दगड़ी बनाने वाली यूनिटों में कामकाज अब ढीला होता नजर आ रहा है। सीजन की तैयारी में लगीं यह यूनिटें अब उच्च गुणवत्ता वाली महामाया धान की खोज में है, जिसकी आवक कृषि उपज मंडियों में तेजी से कम हो रही है।
जानिए दगड़ी को
उच्च गुणवत्ता वाले महामाया धान की जरूरत होती है दगड़ी बनाने के लिए। कुशल कारीगरों के हाथों कड़ी निगरानी के बीच बनने वाली दगड़ी से चिवड़ा बनाया जाता है। उत्पादन के हर कदम पर क्वालिटी, पहली और आखिरी शर्त है। इसलिए अपने प्रदेश की चुनिंदा इकाईयां ही इसका उत्पादन करतीं हैं। खरीदी में भी सतर्कता बरतते हैं खरीददार।

इसलिए खरीदी कमजोर
पैक्ड मिक्चर बनाने वाली महाराष्ट्र की कंपनियां फिलहाल छत्तीसगढ़ की दगड़ी की सबसे बड़ी खरीददार हैं। महामारी के दौर से उबर चुकी यह कंपनियां शादी-ब्याह के लिए निकलने वाली मांग के इंतजार में हैं। अग्रिम तैयारी और अग्रिम खरीदी के बाद इसका बाजार अब स्थिर होता नजर आ रहा है।
स्थिर कीमत
भरपूर मांग का बेहतरीन दौर देख चुकी दगड़ी इस समय 3400 से 3450 रुपए क्विंटल पर स्थिर हो चली है। तेजी के संकेत इसलिए नहीं हैं क्योंकि कंपनियों की खरीदी लगभग पूरी हो चुकी है। घरेलू बाजार से डिमांड तो है लेकिन उसे उल्लेखनीय नहीं माना जा रहा है। थोड़ी बहुत उम्मीद दिसंबर माह में निकलने वाली संभावित मांग से बनी हुई है।
