बंपर आवक से मंडी प्रबंधन का छूट रहा पसीना


भाटापारा। पूरा प्रयास होगा कि रविवार की शाम तक डिस्पैच का काम पूरा कर लिया जाए। शनिवार-रविवार की आवक पर ब्रेक लगाने का फैसला क्या परिणाम सामने लाएगा ? यह तो सोमवार की सुबह ही जानी जा सकेगी लेकिन यह बात साफ जाहिर हो चुकी है कि रिकॉर्ड आवक से मंडी प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं।

अन्नपूर्णा की जैसी कृपा इस बरस किसानों पर हुई है वैसी ही कृपा अब मंडी प्रांगण में भी होती देखी जा रही है। बंपर आवक से कोना-कोना लगभग पैक है। चलने के लिए मुश्किल से मिलती जगह जैसी स्थिति के बाद सूझ नहीं रहा है मंडी प्रशासन को, कैसे स्थिति संभाली जाए ? इसलिए पहले प्रयास के रूप में शनिवार और रविवार की आवक पर रोक लगाने का फैसला लिया गया। अब अब देखना यह है कि सोमवार की आवक को जगह मिलेगी या नहीं ?

इसलिए आवक पर ब्रेक

सप्ताह के शुरुआती दिनों में जब आवक शुरू हुई तब अंदाजा नहीं था कि यह बढ़ती ही जाएगी। लचर प्रबंधन की पोल उस वक्त खुली, जब नीलाम हो चुकी उपज के उठाव में विलंब होना शुरू हुआ। यह क्रम गुरुवार की शाम तक चलता रहा। विवश होकर शनिवार और रविवार की आवक पर रोक लगाने का फैसला लेना पड़ा, ताकि अगले सप्ताह की आवक को जगह मिल सके।

संभालने का प्रयास

ऐन सीजन के शुरुआत में जैसी स्थिति बनी है उसके बाद डिस्पैच पर न केवल नजर रखनी होगी बल्कि उठाव में तेजी के हिदायत मिलर्स को देनी होगी लेकिन इस काम में बाधा बन रही है श्रम बल में कमी का होना। जैसे संकेत मिल रहे हैं उसके मुताबिक अब रविवार को उठाव को पूरा करने के प्रयास है ताकि सोमवार को होने वाली आवक के लिए जगह तैयार की जा सके।

नहीं बता सकते

लचर व्यवस्था की बानगी ही कहिए कि जब पूछा गया कि डिस्पैच के लिए उपज की कितनी मात्रा बाकी है, तब जवाब मिला कि यह बता पाना संभव नहीं है। कोशिश कर रहे हैं कि रविवार को भी काम होता रहे और सोमवार से सब कुछ पटरी पर लौट आए। मालूम हो कि बीते खरीफ सत्र में भी ऐसी स्थिति बनी थी, जिस पर मंडी अभिकर्ताओं और मिलर्स के सहयोग से नियंत्रण में लाया जा सका। इस बार ऐसे सार्थक प्रयास होते नजर नहीं आते।

कर रहे प्रयास

रिकॉर्ड आवक की वजह से जाम जैसी स्थिति है। नीलाम हो चुकी उपज का डिस्पैच शीघ्र हो, इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।
– एस एल वर्मा, सचिव, कृषि उपज मंडी, भाटापारा